लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय और कॉलेजों में स्नातक प्रवेश प्रक्रिया का हिस्सा बनने से चूके अभ्यर्थियों के लिए एक राहतभरी खबर है। लविवि और अन्य कॉलेजों ने दाखिले के आवेदन की तारीखें बढ़ा दी गई हैं। अब लविवि में 17 तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा। साथ ही आईटी, नेशनल, नारी और एपी सेन कॉलेज ने भी आवेदन करने की तारीखें आगे खिसकाई हैं।
लविवि में स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की अंतिम तारीख पहले 10 जून थी। 9 जून को विवि प्रशासन ने छात्रों की मांग पर इसे 14 तक बढ़ा दिया। इसके बाद दाखिले के लिए हुए रिकॉर्ड रजिस्ट्रेशन को देखते हुए विवि प्रशासन ने रजिस्ट्रशेन की तारीख शुक्रवार को फिर 17 तक बढ़ा दी है। अब अभ्यर्थी 17 जून की शाम सात बजे तक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। हालांकि, फीस जमा करने की अंतिम तारीख 18 जून ही रहेगी। साथ ही अभ्यर्थी 20 जून की शाम सात बजे तक फॉर्म ऑनलाइन सबमिट कर सकेंगे। वहीं, लविवि से संबद्ध कॉलेजों ने भी छात्रों को सहूलियत देते हुए आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने का फैसला किया है। आईटी कॉलेज में स्नातक कक्षाओं में अब फॉर्म 14 की बजाय 17 जून तक मिलेंगे। वहीं, नेशनल डिग्री कॉलेज में फॉर्म मिलने की तारीख 15 से 17, नारी शिक्षा निकेतन डिग्री कॉलेज में 18 और एपी सेन गर्ल्स डिग्री कॉलेज में 20 जून तक बढ़ा दी गई है। क्रिश्चियन कॉलेज में आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 जून ही है लेकिन विलंब शुल्क 100 रुपये के साथ 18 जून तक फॉर्म भरे जा सकेंगे।
लविवि में रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 34 हजार पार
लविवि में शुक्रवार देर शाम तक रजिस्ट्रेशन कराने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 34, 400 तक पहुंच गई। यह संख्या पिछले साल के रजिस्ट्रेशन के आंकडे़ से ज्यादा है। पिछले साल करीब 24 हजार रजिस्ट्रेशन हुए थे। लविवि प्रवेश समन्वयक प्रो. एनके खरे ने बताया कि अभी तक 17,500 अभ्यर्थियों ने फॉर्म के लिए निर्धारित शुल्क जमा कर दिया है।
सैकड़ों अभ्यर्थियों की स्कॉलरशिप पर जिम्मेदारों का ब्रेक
लखनऊ (ब्यूरो)। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही और शासन की सुस्ती से विवि के सैकड़ों अभ्यर्थियों का भविष्य फंस गया है। विवि प्रशासन ने फीस प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति न आने परास्नातक और स्नातक के सैकड़ों छात्रों के अंकपत्रों के विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा रोक दिए जाने की आशंका है। लविवि प्रशासन ने पिछले साल भी शासन के निर्देशों के तहत स्नातक और परास्नतक के कई छात्रों को जीरो फीस पर दाखिला दिया था। लविवि ने शर्त रखी थी कि फीस प्रतिपूर्ति न होने की दशा में छात्रों को स्वयं अपना शुल्क जमा करना होगा। शुल्क जमा न करा पाने की दशा में उनका रिजल्ट रोक दिया जाएगा। साल बीत जाने के बाद भी अभी तक पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति नहीं भेजी जा सकी है। इससे स्नातक के अंतिम वर्ष के कई छात्रों के अंकपत्र विवि प्रशासन द्वारा रोक दिए गए हैं। छात्रों का आरोप है कि विवि के अधिकारी शासन से पैसा न मिलने की बात कह रहे हैं जबकि शासन के अधिकारी लविवि द्वारा ही गलत जानकारी भेजे जाने की बात कहते हैं। किस पर भरोसा किया जाए, यह उनकी समझ में नहीं आ रहा है। परिणाम रोके जाने की दशा में उनके आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
कुलपति से मिलेगी एसएफआई
फीस प्रतिपूर्ति न मिल पाने के कारण परीक्षा विभाग द्वारा अंकपत्र रोक देने के विषय पर स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के कार्यकर्ता शनिवार को कुलपति प्रो. एसबी निमसे से मिलेंगे। एसएफआई के जिला अध्यक्ष अनुपम ने कहा कि विवि प्रशासन को छात्रों की मदद करनी चाहिए जिससे उनकी दिक्कतें दूर हो सकें।