लखनऊ। प्रशिक्षु दरोगा के प्यार में इंस्पेक्टर संजय राय ने छल-कपट से जो खूनी खेल शुरू किया था, उसका खुलासा भी छल-कपट से हुआ है। महकमे के अफसरों से छल करके प्रेमिका का मोबाइल सर्विलांस पर लेकर वार्तालाप सुना। ढाई लाख में बुलाए शूटरों को सिर्फ 20 हजार थमाए। प्रेम प्रसंग में प्रतिद्वंद्वी को शक के घेरे में खड़ा किया। उसी की तर्ज पर पुलिस अफसरों ने छल-कपट करके वारदात का सनसनीखेज खुलासा किया है। मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर संजय राय के सरकारी पिस्टल व सीयूजी मोबाइल के साथ फरार होने से पुलिस अफसर सशंकित हैं। उन्हें अन्य वारदात व अनहोनी का भी डर सता रहा है। इसके चलते संजय राय व अन्य आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ दबिशें दी जा रही हैं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इंस्पेक्टर संजय राय को क्राइम ब्रांच में तैनाती के दौरान प्रशिक्षु दरोगा प्रेमिका पर शक हुआ। उसने अपराधियों के नंबर सर्विलांस पर लेने के लिए तत्कालीन एसपी क्राइम द्वारा उच्चाधिकारियों को भेजे पत्र में प्रेमिका के मोबाइल का नंबर लिख दिया। शासन से इजाजत मिलने पर मोबाइल नेटवर्क कंपनी से प्रेमिका का नंबर सर्विलांस पर लेकर एक महीने तक वार्तालाप सुनता रहा। प्रेमिका की अकमल व अन्य लोगों से बातचीत से उसका पारा चढ़ने लगा। प्रेमिका से अनबन हुई तो आजमगढ़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे अपने दोस्त संदीप राय से शूटर मांगे। उसे भी पूरी बात नहीं बताई। पांच शूटरों के आने पर उसने ढाई लाख में डील करके 20 हजार रुपये एडवांस दिए लेकिन काम निकलने के बाद शूटरों की कॉल रिसीव नहीं की। इससे खफा तीन शूटर उसके भाई की कार लेकर भाग निकले जबकि, गिरफ्तार किए गए दोनों शूटर खाली हाथ लौटे। माज हत्याकांड के बाद उसकी बुआ व परिवार के अन्य लोगों से संपर्क बनाए रख उन्हें अकमल के प्रति उकसाता रहा। वारदात के खुलासे में जुटी पुलिस टीम को भी उसने उकसाया और अपने करीबी मीडिया कर्मियों को भी भ्रमित करके शक की सुई अकमल की तरफ घुमाता रहा।
वारदात के चार दिन बाद पुलिस को अकमल बेकसूर नजर आया। प्रशिक्षु दरोगा के मोबाइल का कॉल डिटेल खंगालने पर शक की सुई संजय राय की तरफ घूमी तो पुलिस ने भी छल-कपट शुरू किया। अकमल को विश्वास में लेने के साथ पूछताछ के बहाने बुलाया और उसे गुप्त स्थान पर छुपा दिया। इसके बाद अकमल की तलाश की बात कहती रही। आजमगढ़ से दो शूटरों को पकड़ने के बाद एसएसपी ने संजय राय को तलब किया। उसके फरार होने पर घर पर दबिश देकर उसके राजदार नौकर रामबाबू उर्फ छोटू को पकड़ा। उससे पूछताछ शुरू करते ही सीओ गाजीपुर विशाल पांडेय ने कहा कि तुम्हारे गुरू जी ने सब बता दिया है, अब तुम भी बता डालो। छोटू ने दो शूटरों को गिरफ्त में देखते ही समझ लिया कि उसका बॉस संजय राय भी पकड़ा जा चुका है। इसके साथ छोटू ने माज हत्याकांड के राज उगलने शुरू किए और पुलिस अफसर सन्न रह गए।
अनहोनी का अंदेशा
सरकारी पिस्टल व सीयूजी फोन समेत फरार इंस्पेक्टर संजय राय की तलाश में पुलिस की टीमें विभिन्न स्थानों पर दबिश दे रही हैं। कई नंबरों पर कान लगे हैं। संजय राय द्वारा आत्मसमर्पण की तैयारी व विदेश भागने के प्रयास की चर्चाओं के बीच अनहोनी का भी अंदेशा जताया जा रहा है। अफसरों को डर है कि प्रेम प्रसंग में खूनी खेल खेलने वाला फरार इंस्पेक्टर अन्य वारदात भी अंजाम दे सकता है। इसके अलावा परिवार, बदनामी व अन्य बिंदुओं के चलते उसके द्वारा कोई अप्रिय कदम भी उठाने का खतरा बना हुआ है।
इलाहाबाद में मिला आखिरी लोकेशन
पुलिस सूत्रों ने जानकारी दी है कि फरार इंस्पेक्टर संजय राय की आखिरी लोकेशन इलाहाबाद में मिली है। वह सोमवार दोपहर इलाहाबाद में था। सीओ गाजीपुर विशाल पांडेय ने बताया कि पुलिस की एक टीम वाराणसी रवाना की गई है। आजमगढ़ व देवरिया में पुलिस की दबिश अभी जारी है। उम्रकैदी संदीप राय से दोबारा पूछताछ के निर्देश भी दिए गए हैं।