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टूटे तार से चिपके दो मासूम भाई, एक की मौत

Wed, 12 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। राजधानी के बालाघाट उपकेंद्र क्षेत्र में मंगलवार को बिजली के टूटे तार से दो सगे भाई चिपक गए। करंट से तड़पते दोनों मासूमों को इलाकाई लोगों ने लाठी-डंडे से छुड़ाया, लेकिन तब तक एक मासूम की मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरा जख्मी हो गया। मृतक बच्चा केजी का छात्र था। उधर, घटना के बाद लोगों ने मासूम का शव सड़क पर रखकर जमकर बवाल किया। प्रदर्शनकारी लेसा पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। उनका ये भी कहना था कि मासूम की मौत के जिम्मेदारों को सजा मिलनी चाहिए। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 40 हजार रुपए मुआवजा देकर दोषियों पर कार्रवाई करने का वादा किया तो लोगों ने रास्ते से शव हटाया। पिछले साल 21 जुलाई को जवाहर भवन उपकेंद्र क्षेत्र में स्टे वायर के करंट से चिपककर मासूम बच्ची लक्ष्मी की भी मौत हो गई थी।
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मंगलवार पूर्वाह्न 11:15 बजे सआदतगंज के महबूबगंज स्थित नऊवनटोला निवासी सब्जी विक्रेता मुबारक अली के बेटे सोफियान (8) व रेहान (5) पड़ोस में रहने वाले दादा मदारु और दादी उल्फत से मिलने जा रहे थे। हालांकि दादा-दादी के घर से कुछ कदम पहले वे एलटी (220 वोल्ट) लाइन के टूटे तार की चपेट में आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो रेहान के सिर से टूटा तार टकराया तो वह चिपक गया। उसे बचाने के लिए सोफियान हाथ से तार हटाने लगा तो वह भी जोरदार चीख के साथ चिपक गया और दोनों तड़पने लगे। आसपास के लोग नजारा देखकर सकते में आ गए। वे भागकर लाठी-डंडा लाए और उससे तार हटाया, लेकिन तब तक रेहान की मौत हो चुकी थी। सोफियान को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। पुलिस के अनुसार रेहान घर के पास स्थित सनराइज मांटेसरी स्कूल में केजी का छात्र था, जबकि सोफियान इसी स्कूल में कक्षा दो में पढ़ता है। इस घटना के बाद आहत लोगों ने पहले महबूबगंज तिराहे पर आवागमन ठप करके प्रदर्शन किया। यहां पर पुलिस ने दबाव देकर प्रदर्शन खत्म कराया तो शाम को लोगों ने ठाकुरगंज में हरदोई रोड पर टीवी अस्पताल के सामने रेहान का शव रखकर आवागमन ठप कर दिया।

40 हजार की सहायता
मासूम की मौत पर लोगों का आक्रोश बढ़ा तो बाजारखाला क्षेत्राधिकारी राजकुमार अग्रवाल एवं अपर सिटी मजिस्ट्रेट छोटेलाल मिश्रा मौके पर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से रेहान के घरवालों को पांच लाख रुपए का मुआवजा और लेसा कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। अधिकारियों ने मौके पर ही 40 हजार रुपए की सहायता दी। इसमें से 20 हजार रुपए डीएम, 15 हजार रुपए पुलिस एवं पांच हजार रुपए जनता ने एकत्र कर दिए। अधिकारियों ने दो लाख रुपए मुआवजा दिलाने का वादा किया तो प्रदर्शनकारियों ने रेहान का शव हटाया।
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हादसे का कारण
पुलिस ने बताया कि नऊवनटोला निवासी घोसी बब्बू सुबह सात बजे घर के पास का चिलवल का पेड़ काट रहा था। कटे पेड़ की डाल एलटी लाइन पर गिरी तो तार टूट गया। यह तार जमीन से थोड़ी ऊंचाई झूल रहा था, लेकिन घोसी ने लापरवाही करते हुए इसकी सूचना उपकेंद्र को नहीं दी। इसी बीच, दोनों मासूम निकले और हादसे का शिकार हो गए।

भंडारे में व्यस्त थे लेसा अफसर
प्रदर्शनकारियों की अगुवाई करने वाले अंबरगंज के पार्षद मोहम्मद अहसन एवं पूर्व पार्षद सुशील शुक्ला ने कहा कि हादसे के बाद जीएम, बालाघाट उपकेंद्र, जूनियर इंजीनियर व कंट्रोल रूम पर बिजली बंद करने के लिए कॉल की गई, लेकिन कहीं कॉल रिसीव नहीं हुई। दोनों नेताओं ने बताया कि काफी देर बाद उपकेंद्र के एक कर्मचारी ने जानकारी दी कि अफसर जीएम के घर गए हैं। वहां भंडारे का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे, लेकिन लेसा का कोई अफसर नहीं पहुंचा।

कर्मी चेतते तो बचती जान
पार्षद मोहम्मद अहसन ने बताया कि तार टूटने के बाद सुबह सात बजे बालाघाट उपकेंद्र के जूनियर इंजीनियर एवं उपकेंद्र के मोबाइल पर कॉल करके बिजली बंद कराने की कोशिश की गई पर किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। सुबह सात बजे से पूर्वाह्न 11:15 बजे तक टूटे तार में करंट बहता रहा। अहसन ने कहा कि जूनियर इंजीनियर कॉल रिसीव कर लेते तो हादसा टल जाता और रेहान की जान बच जाती। सरकारी मोबाइल पर कॉल रिसीव न करना इंजीनियरों की आदत बन गई है।
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