लखनऊ। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ प्लानिंग एंड मैनेजमेंट (आईआईपीएम) के एमडी अरिंदम चौधरी के खिलाफ हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन पर आईआईपीएम की लखनऊ शाखा के बीबीए और एमबीए के छात्रों के साथ धोखाधड़ी आरोप है। छात्रों की मानें तो 2011 में एमबीए और बीबीए कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों से लाखों रुपये वसूले गए लेकिन, अब तक एक भी सेमेस्टर की मार्कशीट नहीं दी गई। प्रबंधन लगातार अलग-अलग विश्वविद्यालय से डिग्री का झांसा दे रहा है।
नई दिल्ली से संचालित आईआईपीएम की एक शाखा का संचालन हजरतगंज में हो रहा है। यहां, 2011 में एमबीए और बीबीए कोर्सेज में छात्रों के दाखिले लिए गए थे। छात्रों के मुताबिक, 2011 में दाखिले के साथ बतौर फीस 4.7 लाख रुपये लिए गए। इसके साथ ही, संस्थान प्रबंधन ने गुलबर्ग विश्वविद्यालय कर्नाटक से एमबीए व बीबीए की डिग्री देने का आश्वासन दिया था। कुछ महीनों के बाद सेमेस्टर परीक्षाएं आयोजित की गईं। दो महीने बाद भी नतीजे न आने पर जब प्रबंधन से इस संबंध में पूछताछ की गई तो छात्रों को गुलबर्ग विवि कर्नाटक से अनुबंध समाप्त होने की जानकारी दी गई। छात्रों का आरोप है कि इस दौरान उन पर आईआईपीएम के डिप्लोमा कोर्सेज (जो कहीं से मान्य नहीं है) में दाखिला स्थानांतरित करने के लिए दबाव बनाया गया। इन्कार करने पर 15 दिन बाद महात्मा गांधी विश्वविद्यालय मेघालय से डिग्री दिलाने की बात कही गई। इस विवि के नाम पर सेमेस्टर परीक्षाएं भी कराई गईं लेकिन, अभी तक कोई मार्कशीट नहीं मिली। छात्रों की मानें तो, सितंबर में कोर्स खत्म होने जा रहा है। लेकिन, संस्थान लगातार चक्कर लगवा रहा है। मार्कशीट की मांग को लेकर बीते शुक्रवार को छात्रों ने संस्थान परिसर में हंगामा भी किया था। जिस पर, संस्थान की डीन मोनिका लाल ने सोमवार को मार्कशीट उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था। सोमवार को मार्कशीट लेने पहुंचे छात्रों ने संस्थान प्रबंधन पर मारपीट और अभद्रता करने का आरोप लगाया। इसके बाद छात्रों ने पुलिस महानिदेशक से गुहार लगाई थी। छात्रों की इसी शिकायत के आधार पर हजरतगंज थाने में मामला दर्ज किया गया है।