लखनऊ। पारा क्षेत्र में सोमवार सुबह तेज रफ्तार बेकाबू डीसीएम हाफ डाला ने सड़क किनारे एकमजदूर की झोपड़ी को तोड़ते हुए मासूम व उसकी मां को रौंद डाला। हादसे में घायल मासूम की ट्रॉमा ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। जबकि उसकी मां ट्रॉमा में भर्ती हैं। उसके दाहिने पैर में फ्रैक्चर हो गया। वहीं, मजदूर बाल-बाल बच गया। उधर, चालक हाफ डाला छोड़ भाग गया। जिसे पुलिस ने कब्जे में ले लिया है। एसओ पारा के मुताबिक, मूलत: रायबरेली अहतन जगतपुर निवासी इश्तियाक बुद्धेश्वर चौराहे के पास नाले किनारे झोपड़ी डाल कर पत्नी राबिया व चार वर्षीय मासूम साबिया खातून के साथ रहता है। वह लकड़ी के खिलौने बनाकर परिवार चलाता है। इश्तियाक के मुताबिक, सोमवार को वह झोपड़ी के बाहर पत्नी व बेटी के साथ चारपाई पर बैठकर खाना खा रहा था। इस दौरान एक डीसीएम धीमी रफ्तार से झोपड़ी की तरफ आ रही थी। नजदीक पहुंचते ही अचानक हाफ डाला अनियंत्रित हो गया और तेज रफ्तार में उसकी चारपाई को टक्कर मारकर मासूम बच्ची व पत्नी को रौंद दिया। इसके बाद झोपड़ी को तहस नहस करते हुए फुटपाथ से लड़कर रुक गया। जबकि मजदूर इश्तियाक ने कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई। हादसे में उसे भी मामूली चोटें लगी हैं। चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए दौड़े। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल मासूम बच्ची व उसकी मां को ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मासूम को मृत घोषित कर दिया। जबकि उसकी मां का इलाज चल रहा है। उसके दाहिने पैर में फ्रैक्चर हो गया व बायां पैर भी चोटिल है।
पिता का रो-रोकर बुरा हाल ः चार वर्षीय मासूम बच्ची साबिया की मौत से उसके पिता इश्तियाक का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी के गम में उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। परिजनों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मां राबिया को अभी इसकी जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि वह बार-बार उसके बारे में पूछ रही हैं। मजदूर इश्तियाक ने बताया कि एक महीने पहले ही वह रायबरेली से लखनऊ आया था, लेकिन क्या मालूम था कि यहां उसके साथ ऐसी अनहोनी हो जाएगी।