बिल था पर फॉर्म नहीं
सरिया से लदे ट्रक को नौ मई को सचल दल ने नाका चौराहे पर रोका। ड्राइवर ने दल को एक बंद लिफाफा देते हुए कहा, इसमें सभी अभिलेख हैं। लिफाफे में महज कंप्यूटर से बना हुआ बिल था, जिसमें सरिया की कीमत 3,37,800 रुपये अंकित थी। इसके अलावा कोई दस्तावेज नहीं था। यानी टैक्स चोरी के जरिए सरिया भेजा जा रहा था। फैक्ट्री की तरफ से 1,35,120 रुपये का जुर्माना जमा कराया गया।
एक ही रेट से बनाए बिल
सचल दल ने कानपुर रोड पर 15 मई को सरिया लदे ट्रक को रोका। ड्राइवर के पास से मिले बंद लिफाफे में महज खानापूर्ति के लिए एक बिल निकला। बिल पर सरिया का वजन करीब नौ मीट्रिक टन व कीमत 3.26 लाख रुपये दर्ज थी। ट्रक में सरिया के कई ब्रांड थे लेकिन फौरी तौर पर बिल एक ही रेट से बना दिए गए थे। नोटिस पर कानपुर स्थित फैक्ट्री के प्रबंधन ने 1.21 लाख रुपये का जुर्माना जमा करा माल छुड़ाया।
बहती के साथ जाली बिल
सचल दल ने एक मई की रात 40 टन सरिया गौतमबुद्ध मार्ग स्थित एक गोदाम में उतरते पकड़ी। बंद लिफाफे में मिली बहती पर पश्चिम बंगाल से दिल्ली सरिया ले जाना दर्शाया गया था। लेकिन ड्राइवर के पास मिले दूसरे बंद लिफाफे में वाराणसी की एक फर्म के जाली बिल थे। वाराणसी में वाणिज्य कर अफसरों ने जांच की तो घपला सामने आ गया। व्यापारी को 17 लाख रुपये की सरिया पर 6.80 लाख का जुर्माना चुकाना पड़ा।
लखनऊ। वाणिज्य कर विभाग के कुछ कर्मियों से सांठगांठ कर उद्यमी और कारोबारी धड़ल्ले से सरिया पर टैक्स चोरी कर रहे हैं। पूरे खेल में बंद लिफाफे का खास इस्तेमाल होता है। इसमें सरिया का कंप्यूटराइज्ड बिल व अन्य कागजात होते हैं, जो आमतौर पर फर्जी रहते हैं। इसका विवरण उद्यमी के अभिलेख में नहीं होता। फैक्ट्री से लोड सरिया कारोबारी के गोदाम पहुंचते ही ‘बंद लिफाफा’ फाड़ दिया जाता है। पूरे खेल में वाणिज्य कर विभाग के टैक्स को भारी चपत लगाई जा रही है।
सरिया पर टैक्स चोरी करने के मई में ही कई मामले पकड़े जा चुके हैं। सचल दल को चेकिंग में बंद लिफाफा से कंप्यूटराइज्ड बिल के अलावा अन्य कोई अभिलेख नहीं मिले। इसके कारण उद्यमी से सरिया की आपूर्ति लेने वाले कारोबारी की जानकारी नहीं हो सकी। नतीजन टैक्स चोरी के लिए सिर्फ सरिया उद्यमी पर ही शिकंजा कसा जा सका। उधर, सचल दल असिस्टेंट कमिश्नर एमपी सिंह ने विभागीय सांठगांठ के आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि सरिया से लदे ट्रक आधी रात को अंधाधुंध दौड़ते हैं। इनको हाईवे पर रोकना खतरे से खाली नहीं होता। ऐसे में आमतौर पर मोड़ के आसपास पकड़ कर जांच की कार्रवाई की जा रही है। साथ ही उन्होंने माना कि सरिया उद्यमी ‘बंद लिफाफा’ सिस्टम से टैक्स चोरी कर रहे हैं।