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नए कोर्सेज से गड़बड़ाएगा पढ़ाई का बजट

Thu, 30 May 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में नए सत्र से प्रस्तावित कोर्सेज में अपने बच्चों को पढ़ाने का सपना अभिभावकों की जेब पर काफी भारी पड़ने वाला है। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों के बीच बीबीएयू प्रशासन ने नए कोर्सेज के लिए जो फीस प्रस्तावित की है, वह प्राइवेट कॉलेजों से भी ज्यादा है। इनका प्रॉस्पेक्टस तैयार हो चुका है। फीस के ढांचे से लेकर आवेदन प्रक्रिया तक पर बृहस्पतिवार को आखिरी मुहर लगने की उम्मीद है।
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बीबीएयू के नए कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने कार्यभार संभालने के बाद ही बीबीएयू में नए रोजगापरक कोर्सेज खोलने की बात कही थी। बताया जाता है कि सेल्फ फाइनेंस योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय के लिए लगभग 48 नए कोर्सेज का खाका तैयार भी हो चुका है। इनमें आवेदन की प्रक्रिया जून में शुरू करने की तैयारी है। विभागों को इनके लिए सिलेबस बनाने और कोर्स मैटेरियल तैयार कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। कोर्स को-ऑर्डिनेटर और विभागों से मिली जानकारी के आधार पर नए कोर्सेज का प्रॉस्पेक्टस तैयार कर उसे वेबसाइट पर डाल भी दिया गया है। बृहस्पतिवार को इस संदर्भ में कुलपति ने सभी विभागाध्यक्षों, कोर्स को-ऑर्डिनेटर्स और शिक्षकों की बैठक बुलाई है। इसमें प्रॉस्पेक्टस को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उल्लेखनीय है िक इन कोर्सेज की सीट और फीस का एक प्रस्तावित ढांचा अप्रैल में ही तैयार कर लिया गया था। हालांकि, जिम्मेदारों ने यह बात स्वीकारी थी कि कई कोर्सेज की फीस काफी ज्यादा है। इसके बाद इनकी समीक्षा के लिए कमेटी बनाई गई थी। समीक्षा के बाद भी जो परिवर्तित शुल्क ढांचा जारी हुआ है उसमें एक-दो कोर्सेज को छोड़कर बाकी की स्थिति पहले जैसी ही है। ऐसे में इन कोर्सेज में एडमिशन लेना काफी भारी साबित हो सकता है। इन कोर्सेज की फीस पढ़ाई का पूरा बजट बिगाड़ सकती है। इसके अलावा कुलपति पहले ही कह चुके हैं कि अभ्यर्थियों के आवेदनों के आधार पर ही कोर्सेज का भविष्य तय होगा। जिनमें अच्छे आवेदन आएंगे, वही कोर्स चलाए जाएंगे।
बीबीएयू के नए कोर्सेज और उनकी फीस अगर राजधानी के ही दूसरे विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से तुलना करें और उनका वहां भविष्य देखें तो बीबीएयू के लिए भी यह कवायद अच्छी साबित होती नहीं दिख रही है। कई ऐसे कोर्सेज हैं जिनकी फीस लविवि में संचालित कोर्सेज से भी ज्यादा है। कुछ कोर्सेज को तो लविवि अपने यहां ही बंद करने की कवायद में लगा है। ऐसे में ज्यादा फीस पर बीबीएयू में इन कोर्सेज में दाखिला लेना स्टूडेंट्स के साथ उनके अभिभावकों पर भी भारी पड़ सकता है।
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एक लाख में एमए हिंदी
फीस के निर्धारण में दूरदर्शिता का सीधा अभाव दिखता है। रोजगारपरक तो दूर परंपरागत कोर्स की भी फीस सातवें आसमान पर है। एमए हिंदी के लिए चार सेमेस्टर की फीस एक लाख रुपये तय की गई है। एमबीए के लिए प्रति सेमेस्टर 1.50 लाख वसूले जाने की बात है जबकि 75 हजार प्रति सेमेस्टर फीस पर लविवि के आधा दर्जन एमबीए कोर्स बंद होने की कगार पर हैं। एक लाख रुपये प्रति सेमेस्टर बीटेक की फीस तय की गई है। जीबीटीयू के किसी भी प्राइवेट कॉलेज की तुलना में यह सबसे ज्यादा है। आईआईटी और सरकारी कॉलेजों का यह अनुपात दोगुना है। लॉ की पढ़ाई के लिए सबसे खास माने जाने वाले नेशनल लॉ स्कूल, लखनऊ की फीस लॉ ऑनर्स की प्रति सेमेस्टर 60 हजार रुपये हैं जबकि बीबीएयू ने इसके लिए अपने यहां 75 हजार रुपये फीस निर्धारित कर रखा है। पहली बार शुरू किए जा रहे वन ईयर एलएलएम का शुल्क 1.44 लाख प्रति सेमेस्टर प्रस्तावित किया गया है। यह देश के किसी भी विधिक शिक्षण संस्थान में संभवत: सर्वाधिक है। इतनी मोटी फीस पर इन कोर्सेज को छात्र पूछेंगे, इस पर इसलिए भी संशय है क्योंकि बीबीएयू ने एकेडमिक एक्सीलेंस या प्लेसमेंट का कोई भी ऐसा मानक उदाहरण नहीं रखा है जो छात्रों को आकर्षित कर सके। बीबीएयू के प्रवक्ता डॉ. गोविंद पांडेय का कहना है कि बृहस्पतिवार को बुलाई गई बैठक में सभी पहलुओं पर विचार होगा।

पीजी में घटे आवेदन, पीएचडी में मारामारी
लखनऊ। बीबीएयू का सस्ती फीस और बेहतर संसाधनों का दावा इस बार भी अभ्यर्थियों को लुभाने में नाकाम रहा। बीते साल के मुकाबले इस बार पीजी में आवेदनों की दस प्रतिशत की कमी इसकी पुष्टि करने के लिए काफी है। हालांकि, पीएचडी में बढ़े आवेदनों ने जरूर विश्वविद्यालय की लाज बचाई है। पीएचडी में दो तिहाई आवेदन बढे़ हैं। बीते साल तक अभ्यर्थियों के लिए हॉट रहे कोर्सेज में भी आवेदनों की संख्या आधी तक घट गई है।
बीबीएयू में परास्नातक स्तर पर 23 कोर्स चलाए जाते हैं। इनमें एमबीए, एमफार्मा, एमसीए, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, मासकॉम जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज के अलावा कई पंरपरागत कोर्सेज भी शामिल हैं। इनमें आवेदन की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। तीन से 10 जून के बीच इनमें दाखिले का इम्तिहान होगा। देश के दस शहरों में प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। बीबीएयू में परास्नातक और पीएचडी पाठ्यक्रमों के लिए इस बार कुल 8,812 आवेदन आए हैं जिसमें पीजी के 5,295 और पीएचडी में 3,517 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इस बार विवि प्रशासन ने आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन भी कर दिया था जिससे अभ्यर्थियों को घर बैठे आवेदन करने की सुविधा मिली। कुल आवेदनों में से 5,229 आवेदन ऑनलाइन मोड में ही जमा हुए।
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