लखनऊ। श्रीराम औद्योगिक अनाथालय का विवादों से पुराना नाता रहा है। अनाथालय की अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी पर अवैध ढंग से बच्चा गोद देने का ही नहीं बच्चा बेचने और उनसे अमानवीय व्यवहार करने के आरोप भी लग चुके हैं। इसमें विशेष बच्चों को बीमार होने पर अनाथालय से बाहर फेंकने तक शामिल है। अनाथालय के पूर्व स्टाप ने अधीक्षिका के खिलाफ एडीएम, डीएम व एसएसपी से लिखित शिकायत भी की, लेकिन जिला प्रशासन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सका है। जांच भी अधूरी है। श्रीराम औद्योगिक अनाथालय से जबरन निकाले गए पूर्व कर्मचारी बताते हैं कि अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी बच्चों के उत्पीड़न के मामले में कई बार घिर चुकी हैं। उन्होंने तीन विशेष बच्चों पूजा, आशा व शिवान को गार्ड के जरिये बाहर फिंकवा दिया था। इसी दौरान कस्तूरी (13) अनाथालय से लापता हो गई। इसी तरह झांसा देकर संवासिनी पिंकी का विवाह कराया गया, जो अप्रैल 2011 में वापस आ गई, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जिसने साथ नहीं दिया उसे निकाला
पूर्व कर्मचारी अभिषेक शुक्ला का कहना है कि कस्तूरी मामले में अधीक्षिका ने उनके खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कराकर जेल भेजने की कोशिश की थी। साथ न देने के चलते अधीक्षिका ने उन्हें व दो अन्य कर्मचारियों मैट्रन अनुपमा द्विवेदी और खुद अपनी बहन काउंसलर श्रुति त्रिपाठी को भी बिना नोटिस दिए अनाथालय से निकाल दिया। अभिषेक ने कहा कि इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर महिला आयोग व पुलिस अफसर तक की जा चुकी है, लेकिन दबाव के चलते जांच अधूरी है।