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जरूरतों की प्रयोगशाला में पनपे अनूठे आविष्कार

Fri, 10 May 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। बीबीएयू के दीक्षांत आडिटोरियम के बाएं तरफ के सभागार में इनोवेटर्स की प्रदर्शनी लगी है। इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित आविष्कार प्रयोगशालाओं की चारदीवारी में रासायनिक अभिक्रियाओं की देन है। यह आविष्कार खेत-खलिहान से लेकर रोजमर्रा की जरूरतों की प्रयोगशाला में पनपे हैं। इनोवेटर्स में शायद ही किसी के पास विज्ञान और किसी बड़े विश्वविद्यालय की डिग्री है। लेकिन इनके द्वारा विकसित की गई तकनीक मानकों एवं व्यवहारिक आवश्यकताओं पर इतने खरी है कि सिद्धहस्त वैज्ञानिक भी चकित रह जाएं। ऐसे ही इनोवेटर्स एवं उनके इनोवेशन पर अमर उजाला ने बातचीत की -
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छेड़छाड़ की तो 440 वोल्ट का झटका देगी अंतिमा
शोहदों के लिए सावधान होने का समय है यदि, वह नहीं सुधरे तो अंतिमा उन्हें मिनटों में मजा चखा देगी। भदोही के शेषमणि मौर्या द्वारा बनाई गई घड़ी जिसका नाम उन्होंने अपनी बिटिया के नाम पर रखा है 440 वोल्ट का झटका देती है। वह बताते हैं कि घड़ी को कलाई में बांधा जा सकता है। यह आम कलाई घड़ी जैसी ही है। किसी भी संकट के समय इसका स्विच ऑन करना भर है। फिर परेशान करने वाले से टच कराते ही यह उसे 440 वोल्ट का झटका देती है। इससे वह कुछ समय के लिए अचेत सा हो सकता है। उन्होंने इसका उन्नत मॉडल भी तैयार किया है जो 11 हजार वोल्ट का झटका देती है। इसे ऑन करते ही 6 फीट की दूरी में आने वाले प्रत्येक शख्स को यह झटका महसूस होगा लेकिन पहनने वाले को कोई समस्या नहीं होगी। वह बताते हैं कि अभी वह प्रयास में हैं कि इसे सीधे 100 नंबर से जोड़ दिया जाए। जिससे पुलिस की मदद लेने में भी आसानी हो। इसके लिए उन्होंने पुलिस अधिकारियों को पत्र भी लिखा है।
फावडे़ से बुआई कर पैदा करें 280 क्विंटल आलू
इनोवेटर्स प्रदर्शनी में आए बाराबंकी के रामसरन वर्मा ने ऐसा फावड़ा विकसित किया है जिसकी मदद से एक एकड़ में 280 क्विंटल आलू का उत्पादन आसानी से किया जा सकता है। स्टेनलेस स्टील से बना यह फावडे़ दिखने में सामान्य फावड़ों की तरह है। राम सरन कहते हैं कि मशीन से आलू की बुवाई में 150 क्विंटल आलू ही उत्पादित होता है। वे सहारा विधि से 600 क्विंटल टमाटर पैदा करने का दावा करते हैं। वहीं खुद के द्वारा विकसित की गई केले की जी-9 प्रजाति से एक एकड़ में 450 क्विंटल केले की उत्पादन का भी उनका दावा है। उनका स्प्रे यंत्र खेतों में कीटनाशक डालने के साथ ही आग बुझाने के काम में लाया जा सकता है। यह एक मिनट में 150 लीटर पानी फेंकता है।
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धान की गोली से सीधे करें बुवाई
धान की फसल के लिए पहले बेरन डालने की जरूरत पड़ती है उसके बाद फिर उसे उखाड़ कर तैयार किए गए खेतों में लगाया जाता है। इलाहाबाद से आए राम अभिलाष पटेल द्वारा विकसित की गई धान की गोलियों को सीधे ही बुवाई के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है। वह बताते हैं कि इसे तालाब की मिट्टी और धान को आपस मे मिलाकर छोटी-छोटी गोलियों के रूप में बनाया गया है। तैयार किए गए खेत में इसकी बुवाई कर किसान कम से कम 20 दिन का समय बचा सकता है। फसल की पैदावार भी इस पद्धति से ज्यादा होगी और धान कम से कम 15 दिन पहले काटा जा सकेगा। उन्होंने देसी गाय के गोबर और मूत्र के उपयोग से घड़ी चलाने में सफलता पाई है।
देसी बीजों से पैदा करें दोगुनी फसलें
बनारस से आए दृष्टिबाधित किसान श्रीप्रकाश सिंह रघुवंशी ने बताया कि उनके विकसित किए गए बीजों की मदद से फसलों की पैदावार दोगुना तक बढ़ाई जा सकती है। वे कहते हैं कि बचपन में आंख की रोशनी चली जाने के बाद पिता जी के साथ खेतों में काम करते हुए उन्होंने बीज चयन की तकनीक सीखी। बीएचयू के डॉ. महातिन सिंह ने उन्हें इस पर काम करने की सलाह दी और मदद भी की। श्रीप्रकाश ने अब तक गेहूं की 100, धान की 20 और विभिन्न सब्जियों की 25 कुदरत प्रजातियां विकसित की हैं। साथ ही दलहन फसलों के बीज भी तैयार किए हैं। संकर बीज से किसान एक एकड़ में 12 से 15 क्ंिवटल गेहूं पैदा करते हैं लेकिन उनकी कुदरत-9 प्रजाति से 25 से 28 क्ंिवटल गेहूं पैदा होता है। कुदरत-3 प्रजाति के धान से 32 क्विंटल उपज प्राप्त की जा सकती है। उनकी कुदरत प्रजाति की सबसे बड़ी लौकी 8 फीट की है।
मेघराज सींचेंगे मिनटों में खेत
गोंडा से आए राम सजीवन द्वारा विकसित किए गए मेघराज रनिंग स्प्रे से मिनटों में 60 फीट त्रिज्या के खेत को सींचा जा सकता है। राम सजीवन ने बताया कि यह यंत्र एक मोटर से चलता है जो पानी को प्रेशर से फेंकता है। प्रेशर से एक पोल पर लगी एस आकार की पाइप घूमने लगती है। पाइप में छेद होता है इसी से पानी निकलता है। पाइप के गोलाई में घूमने से पानी भी गोलाई में निकलता है जिससे पूरे क्षेत्र की सिंचाई एक स्थान से की जा सकती है। बस स्प्रे को खेत के बीचों बीच लगाना होता है। यह बरसात कराने जैसा है इसके लिए खेत के समतल और उबड़-खाबड़ होने पर भी कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसकी मदद से कीटनाशकों का भी छिड़काव किया जा सकता है।
घास के लड्डू बनाएंगे तंदुरुस्त
भले ही इतिहास में घास की रोटी को मुफलिसी से जोड़ा गया हो लेकिन गोंडा के संदीप द्विवेदी ने इसमें तंदरुस्ती का रास्ता खोला है। उन्होंने दूब से लड्डू बनाए हैं जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इनके द्वारा विकसित दूर्वा टैबलेट्स भी कई बीमारियों से लड़ने में सहायक हैं। वह बताते हैं कि दूर्वा रस और दूर्वा अर्क की मदद से बने दूर्वा आटे में बनी रोटियां गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक हैं। इसका उपयोग कई प्रकार के मनोरोगों, रक्त विकार, श्वास संबंधी रोगों के अलावा कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है। संदीप को उनके इस इनोवेशन के लिए इसरो के पूर्व अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन और यूपी सीएसटी द्वारा सराहा और पुरस्कृत किया जा चुका है।
एक फोन से बंद और चालू होंगे घर के विद्युत उपकरण
घर में पंखा, लाइट और टीवी खुला छोड़ आएं हैं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसे बस एक टेलीफोन कॉल से बंद किया जा सकेगा। इसके लिए आपको आगरा के मेघव्रत आर्या और मो. आवेश द्वारा बनाई गई सर्किट को अपने घर के बिजली के बोर्ड में लगाना होगा। आर्या ने बताया कि डिवाइस की कॉस्ट बिना मोबाइल फोन के लगभग 3 हजार रुपए के आसपास बैठती है। डिवाइस से कनेक्ट मोबाइल पर आपको कॉल करनी होगी और प्री रिकॉर्डेड वायस के निर्देशों का पालन करना होगा। वहीं घर में हैं तो ब्लूटूथ के माध्यम से बिना कॉल किए ही आप विद्युत उपकरणों को चालू और बंद कर सकेंगे।
एक कॉल से होगा गाड़ी का इंजन लॉक
गाड़ी चोरी रोकने के लिए सहारनपुर के विपिन कुमार द्वारा बनाए गए एंटी थेफ्ट डिवाइस से एक कॉल पर गाड़ी का इंजन लॉक किया जा सकेगा। विपिन ने बताया कि कार के इंजन में उनकी डिवाइस को सेट करके इसे सिमकार्ड से कनेक्ट किया गया है। इसके साथ ही कार के विंडो में सेंसर लगे हैं। जैसे ही कोई कार की विंडो खोलेगा तुरंत ही कार के मालिक को मैसेज मिल जाएगा और कार में लगा कैमरा उसकी हरकत को रिकॉर्ड कर लेगा। कार को यदि वह चोरी करने में सफल भी हो जाता है तो भी वह भाग नहीं पाएगा। बस एक कॉल पर उसका इंजन अपने आप बंद हो जाएगा।
मिनीहैंड जनरेटर 5 घंटे तक देगा रोशनी
हेमंत कुमार द्वारा विकसित किया गया मिनी हैंड जनरेटर 5 मिनट चलाने के बाद 5 घंटे तक रोशनी देगा। हेमंत ने बताया कि जनरेटर में छोटा डायनमो लगा है जिसे हाथ से ही चलाया जा सकेगा। इसके हैंडल को पांच मिनट तक घुमाने पर इससे अटैच बैटरी चार्ज हो जाती है। इससे एलईडी बल्ब का पैनल जुड़ा हुआ है जो कि 5 घंटे तक रोशनी दे सकेगा। हेमंत ने विंड टरबाइन भी बनाया है जिसे घर की छत पर लगाया जा सकता है। यह हवा से चलेगा और एनर्जी जनरेट करेगा। इसे स्टोर करके विद्युत उपकरणों को चलाया जा सकेगा। हेमंत ने सेमी कंडक्टर हीटर भी विकसित किया है जो कम बिजली में चलाया जा सकेगा। इसे यूरीनरी वेस्ट से भी चलाया जा सकता है।
गाड़ी का कार्बन छान फिल्टर रोकेगा प्रदूषण
राजधानी के सीएम सेन द्वारा विकसित की गई पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइस धुएं से कार्बन छान लेती है जिससे वातावरण को कम नुकसान पहुंचता है। वहीं ट्रैक्टर के साइलेंसर के स्थान पर इसे लगाने से न सिर्फ उससे निकलने वाला कार्बन फिल्टर होता है बल्कि उसकी आवाज भी काफी कम हो जाती है। साइलेंसर की सर्विस नहीं होती है जबकि इसकी सर्विस कराकर फिल्टर से छाना गया कार्बन बाहर निकाला जा सकता है। सेन ने साइकिल और रिक्शा चालकों की मदद के लिए उसमें विशेष शॉकर लगाए हैं जो उनकी कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी करते हैं।
बिना खर्च के उत्पन्न होगी बिजली
सिद्घार्थनगर के भुवनेश्वर प्रसाद की पॉवर सल्यूशन डिवाइस बिना किसी अन्य खर्च के बिजली पैदा करती है। उन्होंने बताया कि यह वेट लिफ्टिंग के सिद्धांत पर काम करती है, जो 30 हजार की लागत लगाने के बाद बिना एक भी रुपया लगाए 5 केवीए बिजली का उत्पादन करती है। पेटेंट के लिए प्रयास करने के कारण वह मशीन की अन्य जानकारी नहीं दे सके। लेकिन कहा कि यह भविष्य में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
घर में नहीं है तो भी नहीं सूखेंगे पौधे
कई दिन के लिए बाहर जाने की सोच रहे हैं तो आप अपने घर में अब्दुल कलीम की ऑटोमेटिक फ्लावर पॉट वाटरिंग मशीन लगा सकते हैं। घर से बाहर जाने पर यह पौधों को अपने आप ही पानी देता रहेगा। कलीम बताते हैं कि इसमें एक मोटर और सेंसर लगा हुआ है जो पौधे की जरूरत के मुताबिक उसे समय-समय पर पानी देता रहता है। जैसे ही गमले में नमी की कमी हुई मोटर ऑटोमेटिक ही स्टॉर्ट हो जाएगा और उसमें जितना पानी डालना है अपने आप ही चला जाएगा।
बैल की मदद पंप करेगा सिंचाई
बैल आज भी काम के लायक हैं यह कहना है ललितपुर जिले से अपने इनोवेशन का प्रदर्शन करने आए मूरत सिंह का। उन्होंने बुलक वॉटर पंप बनाया है जो बैलों की मदद से पानी देता है। बस जहां पर बोर किया गया है वहां उनका यह पंप लगाकर उसमें बैलों को नाथ देना होता है वह गोलाई में घूमेंगे और पंप से पानी निकलेेगा जिसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है।
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