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गोमती के तटों के लिए देखा सुनहरा सपना

Fri, 26 Apr 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। गोमती और उसके तटों को संवारने के लिए स्वप्न सरीखी परिकल्पना तैयार कर ली गई है। जो खाका खींचा गया है उसके मुताबिक गोमती के किनारे हरे घास के पार्कनुमा मैदान होंगे। इनमें बच्चों के लिए झूले होंगे। साथ ही बाजार और रेस्टोरेंट दिखेंगे। हस्तकला के शौकीनों के लिए अवध हाट होगा। गोमती के बीच रंगीन फव्वारा संगीत के साथ अपनी छटा बिखरेगा। वाटर टैक्सी के जरिए लोगों के लिए शहर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का तेज साधन होगा, तो पर्यटकों को गोमती के किनारे पड़ने वाली धरोहरों का दर्शन बहुमंजिले स्टीमर से कराया जाएगा। विश्व के सबसे ऊंचे टावर जिसमें रेस्टोरेंट और कुछ अन्य प्रतिष्ठान हों, इसकी भी कल्पना की गई है। गोमती में पुष्प, प्रतिमाओं और पूजन सामग्री का विसर्जन रोकने के लिए अलग से जलाशय तैयार किया जाएगा। इसके पानी को ट्रीट कर के गोमती में छोड़ा जाएगा। फिलहाल सबसे जरूरी गोमती और उसके तटों की स्वच्छता में आड़े आ रही परेशानियों फिलहाल दूर करना होगा। इसमें सबसे पहले गोमती में सीधे गिर रहे नालों को एसटीपी से जोड़ेंगे। तटों से अवैध कब्जा हटवाया जाएगा। इसी के साथ करीब डेढ़ किलोमीटर तक रिटेनिंग वॉल बनाने के लिए विभिन्न विभागों से एनओसी की प्रक्रिया 15 मई से शुरू कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट गोमती रिवर फ्रंट डवलपमेंट को अमलीजामा पहनाने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण में बृहस्पतिवार को एक प्रजेेंटेशन किया गया। इस परियोजना के लिए आर्किटेक्ट कंसलटेंट चुने गए अरबन एक्वा ग्रुप के प्रतिनिधि आशीष श्रीवास्तव ने एलडीए में अपनी प्रस्तुति की। इस दौरान प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अष्टभुजा प्रसाद तिवारी के अलावा सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम्य नियोजन और नगर निगम के अधिकारी यहां मौजूद रहे।
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यह सब होगा रिवर फ्रंट में खास
रिवर फ्रंट रोप वे ट्राली और पुल से पहुंचेंगे ः रिवर फ्रंट क्षेत्र में आने के लिए पुल और रोपवे ट्राली का सहारा लिया जाएगा। रिवर फ्रंट पहुंचने के लिए वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित होगा। यहां आने के लिए जो पुल बनाया जाएगा, वह इतना खूबसूरत बनाया जाएगा कि, लोगों को पैदल चलने में भी मजा आए। रोप वे ट्राली जिसका इस्तेमाल अब तक पहाड़ों में किया जाता रहा है, वह लखनऊ में भी संचालित होगी।
विसर्जन के लिए बनाएंगे जलाशय ः प्रतिमा, पूजन सामग्री और पुष्पों आदि के विसर्जन के लिए गोमती के सामने मनकामेश्वर मंदिर के नजदीक एक जलाशय बनाया जाएगा। इस जलाशय में ही विसर्जन होगा। इस जलाशय का पानी एक छोटे ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट करके गोमती में छोड़ा जाएगा। जिससे विसर्जन से होने वाले प्रदूषण से गोमती को बचाया जा सके।
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मनोरंजन के लिए सबसे खास ः यहां बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मनोरंजन के खास इंतजाम होंगे। हॉट एयर बैलून, वाटर स्पोर्ट्स, वाटर क्रूज टूरिज्म, टैरेस रेस्टोरेंट, तैरते बाजार और नौकायन का इंतजाम भी यहां होगा। बच्चों के लिए पार्क और उसमें झूले होंगे। पानी में कलरफुल फाउंटेन होंगे। जिनके संचालन के दौरान संगीत बजेगा। फव्वारे चलते समय उस पर प्रोजेक्टर के माध्यम लखनऊ की धरोहरों की झलक भी दिखाई जाएगी। यहां एक म्यूजियम होगा जिसमें रिवर फ्रंट डवलपमेंट की पूरी झांकी देखी जा सकेगी। इसके अतिरिक्त भारत में और देश के बाहर जहां भी इस तरह का विकास किया गया है, उसको भी मॉडल्स के माध्यम से झलकाया जाएगा।
हेरेटिज पार्क और अवध हाट ः यहां राजधानी की धरोहरों की दिखाने के लिए एक हेरिटेज पार्क होगा। जिसमें नवाबी कल्चर की पूरी झलक दिखाई देगी। इसके साथ ही दिल्ली हाट की तर्ज पर अवध हाट होगा। इस हाट में अवध की हस्तकलाओं का प्रदर्शन और बिक्री पूरे साल चलेगी। इससे राजधानी में दस्तकारों को बढ़ावा देने के लिए एक स्थाई मंच मिल जाएगा।
जल परिवहन से रास्ता होगा आसान ः अरबन एक्वा ने राजधानी में जल परिवहन को विकल्प बनाने की कोशिश भी रिवर फ्रंट डवलपमेंट के साथ की है। इसके लिए एक विशेष तरह की वाटर टैक्सी डिजाइन की गई है। जो कि कम गहराई के पानी में भी चलाई जा सकेगी। इस टैक्सी की क्षमता 4 से लेकर 20 सवारी तक होगी। इस तरह की टैक्सी संचालन के लिए गोमती में बहुत पुराने पुलों के जो पिलर भीतर हैं, उनको हटाया जाएगा। हनुमान सेतु से चौक तक पहुंचने में मात्र 10 मिनट का समय इस टैक्सी के जरिए लगेगा। यह टैक्सी पानी में जिगजैग करते हुए चलेगी ताकि लोेग गोमती के दोनों तटों की खूबसूरती का आनंद ले सकें।
सबसे ऊंचे टॉवर की भी कल्पना ः करीब 800 मीटर ऊंचे एक टॉवर की कल्पना भी रिवर फ्रंट डवलपमेंट के लिए की गई है। इस टॉवर के जरिए लखनऊ की खूबसूरती को देखा जा सकेगा। इसमें रेस्टोरेंट और छोटे बाजार तक की कल्पना आर्किटेक्ट ने की है। मगर इसको केवल सुझाव के तौर पर पेश किया गया है।
आजम के ड्रीम गेट भी बनेंगे ः रिवर फ्रंट डवलपमेंट की थीम के हिसाब से नगर विकास मंत्री के पूर्व कार्यकाल में हनुमान सेतु और निशातगंज के नजदीक लगाए गए दो गेट भी पूरे कराए जाएंगे। इन गेट के पिलर यहां खड़े हुए हैं। इनको रिवर फ्रंट डवलपमेंट स्कीम में ही समाहित करने पर सहमति बन गई है। जिससे इन गेटों के दोबारा नया रूप लेने का रास्ता साफ हो गया है।
ये अड़चनें करनी होंगी दूर ः रिवर फ्रंट डवलपमेंट में कई अड़चने भी सामने आ रही हैं। जिनमें मुख्य रूप से निम्न को दूर करने का सुझाव दिया गया है....
नालों का पानी सीधा न गिरे ः लक्ष्मण मेला स्थल और शहर के कई अन्य स्थानों पर नाले सीधे गोमती में गिर रहे हैं। इन नालों का सीधा मिलना गोमती के प्रदूषण का मुख्य कारण है। इसको रोकने के लिए जल निगम और नगर निगम को जल्द से जल्द से सभी नालों को सीवरेज पंपिंग स्टेशन से जोड़ कर भरवारा में उनका ट्रीटमेंट किया जाए ताकि गोमती में गंदा पानी न गिरे।

तटों से हटें अवैध कब्जे ः डालीगंज, खाटू श्याम मंदिर और कई अन्य जगह पर नदी किनारे अवैध कब्जे हैं। इनको हटाए जाने के बाद शत प्रतिशत रिवर फ्रंट डवलपमेंट किया जा सकेगा। इस दौरान यहां कोई भी मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल नहीं छेड़े जाएंगे। मगर धार्मिक स्थलों के नाम पर जो अतिरिक्त भूमि घेरी गई है, उसको सिंचाई विभाग वापस लेगा।

शुरुआत मेें होगा 1.7 किमी का काम ः हनुमान सेतु घाट से 1.7 किलोमीटर की लंबाई में विकास का काम सबसे पहले शुरू किया जाएगा। जिसके तहत बांध के 50 मीटर आगे रिटेनिंग वॉल खींचने का काम किया जाएगा। सबसे पहले पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड, केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय से एनओसी के लिए आवेदन किया जाएगा। इन एनओसी के आवेदन के लिए 15 मई तक की डेड लाइन एक्वा ग्रीन को प्राधिकरण ने दी है।
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