लखनऊ। ‘खुली छत के दीये कब के बुझ गए होते, कोई तो है जो इन हवाओं के पर कतर बदलाव की कोशिश में है।’ कुछ ऐसी ही सकारात्मक सोच से तीन मुस्लिम उत्साही युवा सैकड़ों मील की बाबा अमरनाथ यात्रा की तैयारी में हैं। इनका उद्देश्य भक्ति संग सौहार्द के संदेश से हिंदू-मुस्लिम एकता के परवाने को ऐसी अमिट स्याही से लिखने का है, जिसे फिरकापरस्त ताकतें अपने नापाक इरादों से कभी न मिटा पाएं। अमरनाथ यात्रा की तैयारी में जुटा युवाओं का यह दस्ता खुद को सभी धर्मों की कद्र करने वाला मानता है। इनकी यह पहल पिछले दिनों खराब हुई शहर की फिजां से बने दिलों के घाव पर मरहम का काम कर सकती है। बलरामपुर अस्पताल में मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने आए त्रिवेणी नगर के मोहम्मद शाह आजम सिद्दीकी बताते हैं कि मंदिर हो या मस्जिद, सभी पूजा के स्थल हैं। हम चार दोस्त अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। वहां जाकर भोले बाबा का स्थान देखेंगे। डालीगंज के इम्तियाज अली तो इसे सौहार्द यात्रा का नाम देते हैं। वे कहते हैं, सबकी कद्र करना ही सच्चा इस्लाम धर्म है। अदीबों की नई पीढ़ी से मेरी गुजारिश है, संजो कर रखें विरासत को करीने से’। इम्तियाज पहले भी इलाके की समस्याओं में सुधार के लिए खड़े होते रहे हैं। इनके एक साथी प्रशांत सिंह भी अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं। प्रशांत बताते हैं कि हम दोस्त कभी खुद को हिंदू या मुस्लिम नहीं मनाते हैं। हम तो बस इतना जानते हैं कि सभी भारतवासी भाई हैं। प्रशांत कहते हैं, हमारे साथ एक छत के नीचे मुस्लिम परिवार रहते हैं। हम उनकी कुरान व मस्जिद के सामने अपना सिर झुकाते हैं।
खदरा के शहनवाज अंसारी कहते हैं कि इस यात्रा को लेकर बड़ा रोमांच है। बड़ी खुशी होगी जब हम अपनों के संग भोले के दरबार में पहुंचेंगे। इम्तियाज के साथ आया उनका बेटा भी अब्बू के साथ अमरनाथ जाने की जिद कर रहा था, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों ने नियमों का हवाला देकर प्रमाण पत्र बनाने से मना कर दिया। इम्तियाज कहते हैं कि हम चारों दोस्तों को अमरनाथ यात्रा पर जाने की बहुत खुशी है। हमारे परिवार वाले इसकी तैयारियों में लगे हैं।
बच्चे भी भोले के दरबार जाने को बेताब ः बलरामपुर अस्पताल में ईसीजी जांच केंद्र में बैठे कर्मचारी इस बात को समझाते-समझाते परेशान हैं कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अमरनाथ यात्रा पर नहीं जा सकते। इसके बावजूद बच्चे जाने की जिद करते हैं। बृहस्पतिवार को ऐसी ही जिद कर रहे वजीरगंज के दो बच्चों को किसी तरह समझा-बुझाकर मनाया गया। दरअसल उनके घर वाले अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं, जिससे बच्चे भी जिद पर अड़े थे। डालीगंज के अनुराग तो दसवीं बार अमरनाथ यात्रा पर जा रहे हैं।
छह हजार से अधिक मेडिकल प्रमाण पत्र बने ः अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए डेढ़ माह के भीतर छह हजार से अधिक मेडिकल प्रमाण पत्र बनाए जा चुके हैं। बलरामपुर अस्पताल में सबसे ज्यादा तीन हजार से अधिक प्रमाण पत्र बने हैं। वहीं सिविल में दो हजार से अधिक प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। हर दिन सैकड़ों लोग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लाइन में लगे रहते हैं। बलरामपुर अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. यूएन राय बताते हैं कि रोज 60 से अधिक प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। प्रदेश के अन्य जिलों में भी प्रमाण पत्र बनाए जा रहे हैं। लखनऊ से ही इस बार दस हजार से अधिक अमरनाथ यात्री रवाना होंगे।