लखनऊ। खून के अभाव में अब महिला मरीज दम नहीं तोड़ेंगी। राजधानी के महिला अस्पतालों में सबसे ज्यादा ब्लड की जरूरत को समझते हुए निदेशालय स्तर से ब्लड बैंक खोलने की तैयारी की जा रही है। डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तीन ब्लड बैंक शुरू करने की योजना है। अभी शहर के कई बड़े महिला अस्पतालों में ब्लड बैंक नहीं होने से मरीजों को दूसरे सरकारी अस्पतालों व निजी पैथोलॉजी से ही खून का सहारा रहता है। कई बार खून के अभाव में मरीजों की हालत गंभीर होकर मौत तक हो जाती है। शहर के किसी भी महिला अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं है। राजधानी के डफरिन अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं होने से मरीजों को बलरामपुर अस्पताल जाना पड़ता है। यहां के ब्लड बैंक से बलरामपुर अस्पताल के मरीजों को ही खून नहीं मिल पाता। ऐसे में बाहरी अस्पताल की मरीजों के लिए खून देना काफी मुश्किल भरा होता है। इसी तरह झलकारी बाई अस्पताल में ब्लड बैंक नहीं होने से मरीजों को खून के लिए सिविल अस्पताल जाना पड़ता है। लोक बंधु महिला अस्पताल की मरीजों को भी खून के लिए भटकना पड़ता है। इन समस्याओं को देखते हुए पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बैठक कर प्रस्ताव तैयार किया है। डफरिन, झलकारी बाई और लोक बंधु अस्पताल में खुलने वाले ब्लड बैंक पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आएगा। शासन से स्वीकृति मिलने पर नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) ब्लड बैंक का निरीक्षण करने के बाद इन्हें मान्यता देगा। नाको के अधिकारियों का कहना है कि ब्लड बैंक के लिए पर्याप्त स्टाफ की आवश्यकता होगी, जिसकी व्यवस्था करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। हालांकि सीएमओ के अधीन चलने वाले बाल महिला अस्पतालों में भी ब्लड बैंक नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन अस्पतालों में आने वाली तीस प्रतिशत मरीजों को खून की जरूरत होती है। हर दिन चालीस यूनिट से अधिक खून की जरूरत बड़े महिला अस्पताल में मरीजों को होती है।
चार ब्लड बैंक के सहारे तीस से अधिक सरकारी अस्पताल ः जिले में आठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और लगभग नौ बाल महिला चिकित्सालय हैं। इसके अलावा बीस अन्य सरकारी अस्पताल हैं। इन सभी अस्पतालों के मरीजों को केजीएमयू, राममनोहर लोहिया, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और बलरामपुर अस्पताल के ब्लड बैंक पर निर्भर रहना होता है। इनमें से अधिकतर मरीजों को बाहर से 800 से 900 रुपये प्रति यूनिट खून खरीदना पड़ता है।
इनको खून के अभाव में उठानी पड़ी समस्या ः खून नहीं मिलने से महिला अस्पतालों में भर्ती मरीजों को कई बार समस्याओं का सामना करना पड़ा। फरवरी में डफरिन अस्पताल में खून के अभाव में काकोरी की सविता की मौत पर हंगामा हुआ। मार्च में मड़ियांव के केशव की पत्नी बीना को खून नहीं मिलने से हालत बिगड़ने पर परिवार वालों ने बलरामपुर ब्लड बैंक में प्रदर्शन किया। अलीगंज बाल महिला अस्पताल में मड़ियांव निवासी सुधीर की पत्नी को खून नहीं मिला तो अधिकारियों से शिकायत करने के बाद आखिरकार झलकारी बाई में भर्ती कराया। वहां ब्लड नहीं मिलने पर बाहर से खरीद कर लाना पड़ा।