लखनऊ। शहर के केबल उपभोक्ताओं को सेट टॉप बाक्स के लिए अब ज्यादा दिन अपने ऑपरेटर की मिन्नत नहीं करनी पड़ेगी। अगर वह दो हफ्ते में सेट टॉप बॉक्स नहीं लगाता है तो उपभोक्ता दूसरे ऑपरेटर से जुड़कर सेट टॉप बाक्स ले सकेंगे। सेट टॉप बाक्स लगाने के लिए एक पखवारे की मियाद तय करने के साथ ही मनोरंजन कर विभाग ने इस व्यवस्था से ऑपरेटरों का एकाधिकार तोड़ने की तैयारी कर ली है। वर्तमान में शहर में क्षेत्रवार ऑपरेटरों का केबल उपभोक्ताओं पर एकाधिकार है। उनके ग्रुप के रूप में मल्टी सिस्टम ऑपरेटर (एमएसओ) की स्थिति भी अलग नहीं है। केबल उपभोक्ता प्रसारण सेवा व सेट टॉप बाक्स के लिए पूरी तरह एक ही ऑपरेटर पर निर्भर हैं। आपसी समन्वय के चलते ऑपरेटर एक दूसरे के क्षेत्र में दखल नहीं देते हैं। इस अघोषित एकाधिकार व्यवस्था के चलते ही ऑपरेटर को एडवांस देने के बावजूद शहर के कई क्षेत्रों में केबल उपभोक्ताओं को सेट टॉप बाक्स मिलने में हफ्तों का समय लग गया। मांग की अपेक्षा आपूर्ति में कमी अभी तक जारी है। इसके लेकर लोकल ऑपरेटर व एमएसओ एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। 31 मार्च को सेट टॉप बाक्स बिना प्रसारण बंद होने के बाद कई इलाकों में उपभोक्ताओं का गुस्सा सामने आया तो प्रशासन सख्त हुआ। सूत्रों के मुताबिक एक पखवारे बाद ऑपरेटरों का केबल उपभोक्ताओं पर एकाधिकार नहीं रहेगा। इसके लिए ऑपरेटर के साथ एमएसओ भी जिम्मेदार होंगे। एक पखवारे बाद वह किसी भी उपभोक्ता को सेट टॉप बाक्स के लिए इंतजार करने को नहीं कह सकते। उपभोक्ता दूसरे ऑपरेटर से सेवाएं व सेट टॉप बाक्स लेने के लिए स्वतंत्र होगा। मनोरंजन कर विभाग के उपायुक्त सीपी त्रिपाठी कहते हैं कि अगर कोई ऑपरेटर 18 अप्रैल तक सेट टॉप बाक्स की मांग पूरी नहीं कर पाता तो केबल उपभोक्ता दूसरे ऑपरेटर से जुड़ सकेंगे। उसे ऐसा करने व दूसरे ऑपरेटर को सेवाएं देने से रोका नहीं जा सकेगा।
सब्सिडी पर सेट टॉप बाक्स की मांग ः जन अभियान समिति ने केंद्र सरकार से सेट टॉप बाक्स 50 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराने और अनिवार्यता की मियाद छह माह बढ़ाने की मांग की है। समिति के संयोजक चंद्र कुमार छाबड़ा व अन्य पदाधिकारियों ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार जब पेट्रोल, डीजल, गैस सहित तमाम चीजों पर सब्सिडी लगातार दे सकती है तो सेट-टॉप-बाक्स पर एक ही बार सब्सिडी क्यों नहीं मिल सकती! उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सेट टॉप बाक्स लगाने में जो जल्दबाजी की जा रही है वह अव्यवहारिक है। मूल्य को लेकर भ्रम की स्थिति है। इसी के चलते केबल ऑपरेटर मनमाना किराया वसूल सकेंगे।