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एलडीए की बेपरवाही पर सीएम भी तमतमाए

Sat, 06 Apr 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। राजधानी में अवैध निर्माण को लेकर जिले के प्रभारी मंत्री के नाराजगी भरे पत्र की प्रतिक्रिया में शासन ने सीएम का हवाला देते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष से जवाब तलब किया है। मुख्यमंत्री राजधानी में बढ़ते हुए अवैध निर्माण से सख्त नाराज हैं। इस पर शासन ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शहर में अवैध निर्माण के बिगड़ते हालात और एलडीए अधिकारियों की उसमें मिलीभगत का आरोप लगा कर जिला प्रभारी मंत्री शिव प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने नौ बिंदुओं पर प्राधिकरण की शिकायत की थी। जिसमें सबसे गंभीर आरोप यह था कि अब उनका भय दिखाकर भी बिल्डरों से वसूली की जा रही है। इस संबंध में मुख्यमंत्री सदंर्भ का स्पष्टीकरण उपाध्यक्ष से मांगा गया है। जिसमें उन्हें जल्द से जल्द विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट के साथ जवाब शासन को देना होगा। इसके बावजूद शहर में अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई और ध्वस्तीकरण होते कहीं भी नहीं दिखाई दे रहा है। शिव प्रताप यादव की शिकायत के बाद आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग का यह पत्र प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को जारी किया गया है। जो कि उपाध्यक्ष से होता हुआ, सचिव, अपर सचिव और मुख्य अभियंता के बाद अब आरबीओ प्रकोष्ठ के चक्कर काट रहा है। मगर प्राधिकरण के पास न तो औपचारिक जवाब है और न ही शहर में कोई कार्रवाई होती दिख रही है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने भी पिछले दिनों राजधानी में अतिक्रमण हटाकर यातायात व्यवस्था सुचारु करने के आदेश दिए थे।
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वास्तव में सिर्फ औपचारिकता ः वास्तव में देखा जाए तो सिर्फ औपचारिकता ही हो रही है। शहर में पिछले दो महीने से एलडीए कई बार अवैध निर्माण ढहाने की घोषणा कर चुका है। मगर तमाम तैयारियों के बाद सब कुछ ढपोरशंख ही साबित होता है। हर ओर अवैध निर्माण तेजी से किए जा रहे हैं। बादशाह नगर चौराहे के नजदीक, कपूरथला रोड, चारबाग, गोमती नगर, अलीगंज, अमीनाबाद, मौलवीगंज, बर्लिंगटन, सहित शहर के अधिकांश हिस्सों में धड़ल्ले से अवैध इमारतों की ऊंचाई दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। मगर कहीं भी कोई कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। हाईकोर्ट को जिन 22 बिल्डिंगों की सूची दी गई थी, उनके ध्वस्तीकरण का भी नंबर नहीं आ रहा है।
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