लखनऊ। एलडीए ने लखनऊ मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) कमेटी बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। यही कमेटी भविष्य में डीएमआरसी की तरह राजधानी में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का संचालन करेगी। इसके लिए हैदराबाद एसपीवी को ही फाइनल किया गया है। वहां की तर्ज पर ही कमेटी का गठन लखनऊ में भी किया जाएगा। एसपीवी की पूरी प्रक्रिया को समझने के लिए हैदराबाद से डॉक्यूमेंट मंगवाया गया है। हैदराबाद में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत एलएंडटी मेट्रो रेल प्रोजेक्ट का संचालन कर रहा है।
राजधानी में जब से मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई है, इसके लिए हैदराबाद पैटर्न को सबसे अधिक पसंद किया गया है। दरअसल राजधानी के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को लेकर जो भी परिकल्पना की जा रही है, उसमें हैदराबाद से काफी समानताएं हैं। वहां एलएंडटी प्रोजेक्ट का संचालन कर रहा है, जो इस पर आ रहे कुल खर्च का मात्र 12.5 प्रतिशत ही सरकार से ले रहा है। हैदराबाद में करीब 71 किलोमीटर तक मेट्रो रेल चलाई जाएगी, जो पूरी एलीवेटेड होगी। कंपनी ट्रेन में एडवरटाइजिंग, स्टेशन पर कॉमर्शियल एक्टिविटी, टिकट और अन्य इस्तेमाल के लिए भूमि लेकर अपने खर्च पूरे करेगी। 35 साल के लिए परियोजना कंपनी के हवाले कर दी गई है। इसमें पांच साल निर्माण और 30 साल संचालन के हैं। 35 साल बाद 25 साल के लिए सरकार की मर्जी से कंपनी को विस्तार भी दिया जा सकता है। वहां जुलाई 2012 में निर्माण शुरू किया गया और कई जगह पिलर भी खड़े किए जा चुके हैं।
निजी क्षेत्र से जुटाना होगा 20 फीसदी धन
हैदराबाद की ही तर्ज पर लखनऊ में भी मेट्रो रेल परियोजना संचालन की तैयारी की जा रही है। यहां मेट्रो रेल प्रोजेक्ट को विश्व बैंक से करीब 25 फीसदी, केंद्रीय योजना आयोग से 20 फीसदी और एलडीए व आवास विकास परिषद से लगभग 35 फीसदी धन मिल जाने की उम्मीद है। बाकी 20 फीसदी धन निजी क्षेत्र से जुटाकर करीब 18000 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट को संचालित किया जाएगा।
डीएमआरसी को हमने डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) के लिए निर्देशित कर दिया है। हैदराबाद एसपीवी के अध्ययन के लिए डॉक्यूमेंट मंगा लिया है। बहुत जल्द ही एसपीवी बनाने के लिए लीगल प्रोसेस शुरू करा दिया जाएगा।
राजीव अग्रवाल, उपाध्यक्ष, एलडीए