लखनऊ। ‘फीस तो आपको वापस नहीं मिलेगी, भले आप गोमती की तरफ बढ़ जाइए!’ सिविल की तैयारी की कोचिंग कर पूजा पांडेय से महिंद्रा कोचिंग आलमबाग के संचालकों ने यही कहा था जब उसने अपनी फीस वापस मांगी थी। इसके बाद पूजा ने कोचिंग वालों को सबक सिखाने की ठान ली थी। पूजा के मुताबिक कोचिंग संचालकों के रुख से नाराज होकर ही उसने उपभोक्ता फोरम जाने का फैसला किया था। बुधवार को उपभोक्ता फोरम ने महिंद्रा कोचिंग को पूजा की फीस लौटाने के साथ ही 12 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष आरपी पांडेय और सदस्या सीमा भार्गव व राजेंद्र कुमार गुप्ता ने कहा कि बच्चों की सिविल की कोचिंग बंद होने से छात्रों की पढ़ाई में लगातार रुकावट आई। संस्थान बंद होने से उनका समय बरबाद हुआ। सही कोचिंग नहीं मिलने से वे मानसिक रूप से दुखी हुए। ऐसे में महिंद्रा कोचिंग को पूजा को 14,600 रुपए फीस, अगस्त 2011 से फीस लौटाए जाने तक की तिथि तक इस राशि पर 6 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज और, 10 हजार रुपए मानसिक कष्ट व 2,000 रुपए बतौर वाद व्यय देगा। पूजा के साथ-साथ महिंद्रा कोचिंग को अभिषेक भारती को 9,160 रुपए, मीनाक्षी को 18,500 रुपए और विपुल वर्मा को भी फीस लौटानी होगी। पीड़ितों के वकील मुजीब ने बताया कि सभी विद्यार्थी बेहद खुश हैं। हालांकि वे इस बात से कुछ दुखी हैं कि उनकी तैयारियों का एक साल इसमें लग गया। लेकिन इससे वे कम से कम ताउम्र ठगने से बच जाएंगे।
क्या दावे थे, हकीकत क्या निकली
पूजा बताती हैं कि एडमीशन के दौरान महिंद्रा कोचिंग वालों ने उन्हें बताया था कि उनका संस्थान कोचिंग में नंबर एक है। विद्यार्थियों के पढ़ने के लिए एक बड़ी लाइब्रेरी है। पढ़ने को किताबें दी जाएंगी, शिक्षक भी श्रेष्ठ हैं। सेलेक्शन तक कोचिंग दी जाती रहेगी। लेकिन जब एडमीशन लिया तो पता चला कि हकीकत इसके उलट है। उन्हें पढ़ने के लिए किताबों के बजाए 4-5 पन्ने पकड़ाए गए। शिक्षक हर दूसरे रोज बदल जाते। रोज समय से क्लास भी नहीं आते थे। पढ़ाई का कोई माहौल ही नहीं था। न नियमित टेस्ट होते न व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम। फिर एक दिन कोचिंग ही बंद कर दी गई। कुछ दिन बाद इसे खोला गया लेकिन सिविल सर्विसेस के बजाए बैंकिंग परीक्षा की कोचिंग लेने को कहा गया। पूजा कहती हैं कि वे विद्यार्थी महिंद्रा कोचिंग पर केस करके समाज को दिखाना चाहते थे कि कैसे ये कोचिंग की मंडी में सौदागर छात्रों का समय व पैसा बर्बाद करते हैं।