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70 हजार लोगों को चाहिए मनोचिकित्सा काउंसलिंग

Sun, 10 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। राजधानी की 35 लाख की आबादी में 70 हजार लोग ऐसे हैं जिन्हें दिमागी सुकून के लिए मनोवैज्ञानिक मश्विरे की जरूरत है। प्रदेश स्तर पर यह आंकड़ा करीब तीन करोड़ पहुंच जाता है। यह जानकारी प्रदेश के मनोचिकित्सकों ने शनिवार को गोमती नगर में आयोजित एक वर्कशॉप में दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हर छठा व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार या परेशान है और उसे चिकित्सकीय मदद चाहिए। द रिचमंड फैलोशिप सोसायटी की ओर से नव उदय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान परिसर में ‘मानसिक रोगों में पुनर्वास’ नामक विषय पर वर्कशॉप आयोजित की गई थी। इसमें केजीएमयू के वीसी प्रो. डीके गुप्ता मुख्य अतिथि और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेस, बंगलूरू के पूर्व निदेशक डॉ. जीएन नारायण रेड्डी गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद थे। सोसायटी के लखनऊ चैप्टर के अध्यक्ष और केजीएमयू में मनोविज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार अग्रवाल ने वर्कशॉप के आयोजन के उद्देश्यों बारे में बताया। उन्होंने कहा कि देशभर में दो प्रतिशत लोग किसी न किसी मानसिक रोग से ग्रस्त हैं। लखनऊ और उत्तर प्रदेश में भी यही स्थिति है। सरकार को इस ओर बड़े स्तर पर योजनाएं बनाने और काम करवाने की जरूरत है। उन्होंने मानसिक समस्याओं से ग्रस्त लोगों के पुनर्वास की जरूरत बताई। नव उदय मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट के बारे में सोसायटी सचिव डॉ. शशि राय ने बताया कि यह उत्तर भारत में विशिष्ट तौर तरीकों से मनोचिकित्सा देने वाला इकलौता संस्थान है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में मानसिक रोगियों के इलाज के लिए कोई सरकारी योजना नहीं है। इस वर्कशॉप के संचालन में मुख्य रूप से ले. कर्नल एसएस यादव, डॉ. एमसी उप्रेती और आलोक सक्सेना ने योगदान दिया।
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आज जुटेंगे देशभर के मनोचिकित्सक ः बंगलूरू से आए डॉ. कल्याण सुंदरम ने बताया कि रविवार को लखनऊ में आयोजित हो रहे सेमिनार में देशभर के मनोचिकित्सक जुटेंगे। इस दौरान मानसिक रोगियों के पुनर्वास के उपायोें पर एक गाइडलाइन तैयार करने पर चर्चा की जाएगी। वहीं, प्रदेश के मनोरोगी और उनके केयर टेकर भी इसमें शामिल होंगे।
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