फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ऐशबाग में एलडीए की योजना पर ग्रहण

Thu, 07 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण की ऐशबाग में हाउसिंग स्कीम लांच करने की कल्पना पर ग्रहण छाया है। दो बार ऐशबाग टॉवर की स्कीम निरस्त की गई, तीसरी बार जब यहां अमन अपार्टमेंट के नाम से योजना लाने की तैयारी हुई तो इसके निर्माण के लिए कोई ठेकेदार सामने नहीं आया। दरअसल यह भूमि एक कूड़ा घर में तब्दील हो गई है। कूड़े के इस टीले पर नींव डालने का खर्च ही इतना अधिक है कि जितने दाम एलडीए इस प्रोजेक्ट के लिए दे रहा है, उतने में क्वालिटी वाला निर्माण दे पाना संभव नहीं है। ऐसे में ऐशबाग के लिए ग्रुप हाउसिंग स्कीम की एलडीए की प्लानिंग एक बार फिर से धाराशाही होते नजर आ रही है।
विज्ञापन

एलडीए ने करीब चार साल पहले ऐशबाग टॉवर स्कीम लांच की थी। तब इसके लिए करीब 500 आवेदन आए थे। पहले चरण में सिंगल बेडरूम के 500 और डबल बेडरूम के 500 फ्लैट बनाए जाने थे। सिंगल बेडरूम 12 लाख और डबल बेडरूम की कीमत 19 लाख रुपये तय की गई थी। प्राधिकरण ने आवेदन की घोषणा से पहले डिमांड सर्वे कराया था। डिमांड सर्वे में करीब 1270 लोगों ने फ्लैट खरीदने की इच्छा जताई थी। जब आवेदन का वक्त आया तो 500 आवेदकों ने धन जमा किया था। मगर योजना वापस ले गई थी। दो साल बाद वर्ष-2011 में एक बार फिर से योजना जीवित हुई थी। जमीन की कमी को देखते हुए योजना का स्वरूप कुछ छोटा कर दिया गया था। पहली बार जहां इस स्कीम के तहत 1000 फ्लैट बनाए जाने थे, वहीं इस बार केवल 564 फ्लैट ही घोषित किए गए थे। मगर दोबारा भी यह प्लानिंग निरस्त कर दी गई।

मिट्टी गड़बड़ और मालिकाना हक था विवादित
ऐशबाग ईदगाह के पास जहां प्राधिकरण ने अपार्टमेंट बनाने की योजना बनाई थी, वहां की मिट्टी बहुमंजिला इमारत बनाने के लिए उपयुक्त नहीं मानी गई थी। इस इलाके में उद्योग स्थापित हुए हैं, जिनको इंप्रवूमेंट ट्रस्ट से जमीन मिली हुई है। लगातार उद्योगपति इस बात का दावा करते रहे कि जमीन उनके पास लीज पर है। पूर्व वीसी मुकेश कुमार मेश्राम ने स्थानांतरण से पहले बताया था कि जमीन मास्टर प्लान में रिहायशी कॉलोनी के लिए घोषित की गई है। इसलिए उसको एलडीए ने वापस ले लिया है। विवाद का हल हो गया था। मगर कूड़ाघर की भूमि होने की वजह से यहां की मिट्टी ग्रुप हाउसिंग के लिए बहुत खराब थी। इसी वजह से ठेकेदारों ने इसको लेकर कोई रुचि नहीं दिखाई। पिछले दिनों इस संबंध में निविदा प्रक्रिया कराई गई तो अमन अपार्टमेंट के निर्माण के लिए कोई भी कांट्रेक्टर सामने नहीं आया।
विज्ञापन


यहां कूड़ाघर बना दिया गया था। इसलिए फाउंडेशन डालना बहुत महंगा पड़ेगा। इसी के चलते कोई टेंडर नहीं आया है। बहुत जल्द ही नए टेंडर किए जाएंगे। उम्मीद है कि इस बार कोई न कोई कंपनी निर्माण के लिए सामने आएगी। - राजीव अग्रवाल, उपाध्यक्ष, लविप्रा
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें