फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने दी मंदिर की मान्यता के जांच के आदेश

Thu, 07 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। राजधानी के आर्य समाज मंदिर राजाजीपुरम की आर्य प्रतिनिधि सभा से मान्यता और पंजीकृत संस्थान होने की जांच होगी। हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने यह आदेश आर्य समाज मंदिर में विवाह करने वाले जोड़ों की उम्र के मामले में जांच कर रहे अधिकारी को दिया। यही नहीं कोर्ट ने इस संस्थान का सचिव होने का दावा करने वाले अधिवक्ता जय सिंह को भी निर्देश दिया है कि वह अपने दावे के समर्थन में कोर्ट में दाखिल किए गए दस्तावेज की प्रतियां भी जांच अधिकारी के समक्ष पेश करें। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ दस्तावेज पेश किए जाने के दो महीने के भीतर जांच अधिकारी जांच पूरी करने का प्रयास करेगा और अधिवक्ता जय सिंह को सुनवाई का मौका भी देगा।
विज्ञापन

न्यायमूर्ति श्रीनारायण शुक्ल व न्यायमूर्ति सुरेंद्र विक्रम सिंह राठौर की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश इंद्रेश की लंबित याचिका पर दिया। इस मामले में कोर्ट के पहले के आदेश के तहत की गई जांच में जयसिंह की सोसाइटी को आर्य प्रतिनिधि सभा से मान्यता नहीं होने की जानकारी मिली। इस पर जयसिंह ने पूरक शपथ पत्र के साथ कई दस्तावेज पेश किए कि आर्य समाज मंदिर, राजाजीपुरम को आर्य प्रतिनिधि सभा से मान्यता मिली हुई है।
सुनवाई के बाद के बाद कोर्ट ने कहा कि जांच रिपोर्ट से लगता है कि जांच अधिकारी के संज्ञान में ये दस्तावेज नहीं लाए गए, जो प्रथम दृष्टया जयसिंह के पक्ष का समर्थन करते हैं। पर ये दस्तावेज सही हैं या नहीं। इसकी जांच की जरूरत है।
विज्ञापन

गौरतलब है कि शादी के एक मामले में सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ था कि विवाह प्रमाण पत्र आर्य समाज मंदिर राजाजीपुरम से जारी हुआ था। इस पर कोर्ट ने पूछा था कि प्रमाण पत्र में दंपत्ति की लगभग आयु दर्ज करने का क्या आधार होता है। प्रमाण पत्र में संदेह होने पर कोर्ट ने इस मामले की जांच सचिव स्तर के अधिकारी से कराने के निर्देश मुख्य सचिव को दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें