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टेंडर डालने पर नए ठेकेदार को बंधक बनाया

Tue, 05 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। एलडीए में टेंडर की बंदरबांट खतरनाक होती जा रही है। करीब दो करोड़ रुपए के चार टेंडर अपने हक में करने के लिए पुराने ठेकेदारों ने एक नए ठेकेदार को प्राधिकरण के ही एक कमरे में बंधक बना लिया। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ठेकेदार कमरे से निकल सका। इस दौरान प्राधिकरण की दूसरी मंजिल पर स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय के बाहर हंगामा भी हुआ। लेकिन मौके पर मौजूद एलडीए पुलिस चौकी का दस्ता चुपचाप बैठा रहा। मुख्य अभियंता ने लंच पर होने की बात कह कर अपना दामन बचाते हुए कहा कि शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही ठेकों के वितरण में पूरी पारदर्शिता का दावा किया।
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प्राधिकरण में करीब दो सप्ताह पहले विद्युत यांत्रिक के तहत गोमतीनगर विस्तार में रिवर व्यू कॉलोनी के लिए बनाए जाने वाले उपकेंद्र के ठेके (करीब 2.70 करोड़ रुपए) को लेकर दो गुटों में टकराव की स्थिति बनी थी। इसके बाद सोमवार को भी दोपहर करीब दो बजे से हालात विस्फोटक होने लगे। गोमतीनगर विस्तार में सिविल वर्क के चार ठेकों को देने की प्रक्रिया पूरी होनी थी। सूत्रों के मुताबिक, ठेका लेने के लिए कांट्रेक्टरों के कॉकस ने कमर कस रखी थी। ऐन मौके पर चार कामों के लिए नए ठेकेदार के आने से हड़कंप मच गया। काम हाथ से निकलने की आशंका से प्रदेश के ही एक प्राधिकरण में तैनात एक्सईएन के पुत्र को ठेका लेने से रोकने के लिए सहायक अभियंता आरपी यादव के कमरे में बैठाकर घेर लिया गया। धमकाने और पुचकारने के साथ ही एलडीए में काम करने की पद्धति समझाई गई। पुराने ठेकेदार उसे बताते रहे कि तुम नए हो और इस तरह से बीच में आकर ठेका नहीं लिया जाता। इसके लिए एई, एक्सईएन और चीफ इंजीनियर तक से सेटिंग करनी पड़ती है। इस तरह से अभियंता पुत्र को टेंडर डालने से रोके रखा और दूसरी ओर प्रक्रिया पूरी होती रही। उधर, पूरे मामले को लेकर एलडीए पुलिस चौकी प्रभारी शिवमूर्ति मिश्र का कहना था कि ऐसी कोई खास बात नहीं थी और उनके पास कोई भी शिकायत नहीं आई है।

ठेकेदारों की मर्जी ही सबकुछ
एलडीए में कमीशनखोरी का खेल कुछ ऐसे चलता है कि सबकुछ ठेकेदारों की मर्जी से ही होता है। प्रत्येक एस्टीमेट पर 20 से 22 फीसदी तक कमीशन का खेल होता है। चपरासी से लेकर अभियंता तक हिस्सा बांटा जाता है। कमीशन के इस खेल में कई बार तो काम भी ठेकेदारों की मर्जी से ही खोजे जाते हैं। टेंडर डालने के समय कॉकस के ही लोगों ही जमा होते हैं। तय ठेकेदार को ही काम दिया जाता है। ऐसे में अगर एकदम से कोई नया व्यक्ति आ जाता है, तो उसको पटखनी देने के लिए साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई जाती है।
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ऐसी घटना के विषय में जानकारी नहीं है। जिस समय का हंगामा बताया जा रहा है, उस वक्त मैं लंच पर था। इसके बाद में कोई शिकायत भी नहीं आई। एलडीए में ठेका देने के दौरान पूरी पारदर्शिता बरती जाती है।
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- आरके शुक्ल, मुख्य अभियंता, लविप्रा
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