लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएससी (मैथ्स) और बीए के चार छात्रों ने काउंसलिंग के जरिए दाखिला लिया। आई-कार्ड बना, फीस भी जमा हुई और उन्होंने क्लासेस भी कीं लेकिन जब परीक्षा के लिए प्रवेश-पत्र लेने गए तो पता चला कि उनका दाखिला ही निरस्त हो गया। जिम्मेदारों ने पहले तो उनकी शिकायतों पर कान नहीं दिया पर जब हंगामा बढ़ा तो त्रुटि बताते हुए प्रवेश-पत्र जारी करने की बात करने लगे। पूरे मामले का गंभीर पहलू ये है कि इन छात्रों के प्रवेश का रिकॉर्ड ही विश्वविद्यालय के डीटीपी सेल के पास नहीं था। बीएससी (मैथ्स) के छात्र अश्विनी कुमार यादव, अंकित पाठक और बीए के छात्र संकल्प शर्मा व सत्येंद्र वर्मा के साथ ये घटना हुई। लविवि में परीक्षाओं के लिए प्रवेश-पत्र बनाने का काम भी इस बार विश्वविद्यालय से ही हो रहा है। डीटीपी सेल के पास मौजूद डाटा में 25 छात्रों की प्रवेश की सही स्थिति नहीं थी। सेल ने प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों से इस सदंर्भ में जानकारी मांगी। सूत्रों की मानें तो पहली चिट्ठी तो दूर रिमाइंडर पर भी जिम्मेदारों ने कोई कार्रवाई नहीं की। मामला जब कुलपति तक पहुंचा तो उनके आदेश पर प्रवेश समन्वयक की ओर से डीटीपी सेल को जानकारी भेजी गई। इसमें सभी 25 छात्रों के प्रवेश निरस्त होने की बात कही गई। प्रवेश समन्वयक ने बताया कि इन छात्रों ने अपना दाखिला निरस्त करने का प्रत्यावेदन दिया था और शुल्क वापस ले लिया था। इस आधार पर इनके प्रवेश-पत्र जारी नहीं हुए। इसमें चार छात्र ऐसे थे जिनका दाखिला वैध था और वे पढ़ाई भी कर रहे थे।
बाहरी एजेंसी से मिली जानकारी ः परेशान छात्रों ने इस संदर्भ में प्रवेश समन्वयक प्रो. राजीव पांडेय से संपर्क किया। शनिवार की शाम जब प्रवेश समन्वयक ने छात्रों के साथ डीटीपी सेल में विवरण ढूंढना शुरू किया तो छात्रों के प्रवेश की कोई जानकारी नहीं मिली। इस दौरान छात्रों अज्ञैर प्रवेश समन्वयक में तीखी बहस भी हुई। इसके बाद जिम्मेदारों ने प्रवेश में लगाई गई बाहरी एजेंसी से संपर्क किया तो वहां से इनका डाटा मिला। जिम्मेदार इसके बाद भी गलती छात्रों की ही बताते रहे और कहा कि कई बार विषय बदलने के चलते यह समस्या आई जबकि इसमें शामिल एक छात्र का कहना है कि उसने कभी विषय परिवर्तन किया ही नहीं। फिलहाल त्रुटि बताकर छात्रों का प्रवेश-पत्र जारी करने की बात कही जा रही है। साथ ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की जगह उनके कारनामों पर परदा डालने का खेल भी शुरू हो गया है। इस संदर्भ में जब प्रवेश समन्वयक प्रो. राजीव पांडेय से संपर्क करने के लिए उन्हें फोन किया गया तो उन्होंने यूजर बिजी कर लिया।