फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस साल मेट्रो प्रोजेक्ट शुरू करना टेढ़ी खीर

Thu, 21 Feb 2013 05:30 AM IST
Lucknow
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बजट में मेट्रो रेल संचालन को हरी झंडी दे दी है। कवायद शुरू होने के बावजूद परियोजना को इसी साल लागू कर पाना टेढ़ी खीर होगा। बड़ी बात होगी अगर इसी वर्ष मेट्रो को लेकर निर्माण शुरू किया जा सके। दूसरी ओर, शासन का दावा है कि प्रोजेक्ट जमीन पर इसी साल उतरेगा। शासन ने फिलहाल राजधानी में जितने भी प्रोजेक्ट हैं, उनमें से सबसे महत्वपूर्ण इसी को मान लिया है। आवास विभाग से लेकर लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने 2013 में मेट्रो परियोजना की पहली ईंट रखने की कोशिश बुधवार से ही शुरू कर दी।
विज्ञापन

शासन ने लखनऊ मेट्रो को सबसे बड़ी प्राथमिकता घोषित किया है इसके बाद एलडीए ने इंजीनियरों के विशेष टीम के गठन की कवायद भी शुरू कर दी। इसमें तकनीकी रूप से सक्षम अभियंताओं को शामिल किया जाएगा। फिलहाल लगभग तय है कि पीपीपी मॉडल पर मेट्रो का संचालन शुरू करने की तैयारी है। मगर 75 किलोमीटर तक ऊपरगामी मेट्रो में रोड़े भी कम नहीं हैं। पीपीपी को लेकर जो राय बन रही है, उसमें एक बात सबसे बड़ी देखने वाली यह भी है कि 15000 करोड़ रुपए का भारी भरकम बजट जुटाने के लिए कौन सी कंपनी आगे आएगी। और सरकार उसके सामने ऐसा कौन सा प्रस्ताव रखेगी जिसे वह सहज स्वीकार कर ले। बाकी तीन हजार करोड़ रुपए जो कि नागरिक सुविधाओं के ट्रांसफर में लगेंगे, वह कहां से जुटाए जाएंगे। इस सबके अलावा लखनऊ में धरोहर को बचा कर उपरगामी मेट्रो संचालन और अवैध निर्माण, अतिक्रमण जैसे तमाम बिंदुओं को भी देखना होगा। ऐसे में इस साल मेट्रो प्रोजेक्ट का शुरू हो पाना एक बड़ा सवाल होगा।
बीते रोज मुख्यमंत्री ने बजट में लखनऊ के लिए मेट्रो को हरी झंडी दे दी। इस घोषणा के अगले ही दिन हर ओर अधिकारी मुस्तैद नजर आए। आवास विभाग के अधिकारियों ने एलडीए अफसरों को निर्देश दिए कि इस मामले में कोई कोताही न बरती जाए। प्रमुख सचिव आवास प्रवीर कुमार ने बताया कि डे टू डे बेसिस पर मेट्रो परियोजना को आगे बढ़ाने की कोशिश करें। यह सरकार की सर्वोच्य प्राथमिकता में है।
विज्ञापन


जल्द आएगी रिवाइज रिपोर्ट
मेट्रो के संचालन को लेकर डीएमआरसी ने जो डीपीआर बनाई थी, उसे आधार मानते हुए अब एक नई रिवाइज रिपोर्ट बनाई जाएगी। इसमें जहां-जहां ट्रैक भूमिगत जाना है, उसको उपरगामी किया जाएगा। नए रूट के लिए स्टेशन, डिपो और दूरी का चयन किया जाएगा। इसके अलावा नए रूट भी देखे जाएंगे, जिनमें सबसे अधिक कमाई हो ताकि अधिक से अधिक प्रोजेक्ट को वित्तीय तौर पर उपयोगी बनाया जा सकेगा।

बड़ा सवाल पीपीपी या सरकारी
पीपीपी या सरकारी माध्यम यह भी एक बड़ा सवाल है। करीब 15 हजार करोड़ रुपए का खर्च और तीन हजार करोड़ अतिरिक्त। इतना अधिक खर्च करने के लिए कौन सी कंपनी आगे आएगी। दरअसल, सरकार बहुत अधिक खर्च करेगी तो 20 फीसदी यानी करीब तीन हजार करोड़। इससे अधिक के लिए कंपनी को ही आगे आना होगा जबकि कंपनी लखनऊ को पांच साल बाद मेट्रो रेल के लिहाज से क्या इतना उपयोगी मानेगी। इसका भी ख्याल जिम्मेदारों को रखना होगा।

एलडीए में अलग सेल का गठन
एलडीए के सूत्रों के मुताबिक इसको लेकर अधिकारियों और इंजीनियरों का एक अलग सेल गठित किया जाएगा, जिसमें अब तक प्रोजेक्ट से जुड़े रहे टाउन प्लानर रवि जैन के अलावा अच्छा तकनीकी ज्ञान रखने वाले अभियंताओं को भी रखा जाएगा। इनकी तलाश शुरू कर दी गई है। एक एक्सईएन के अलावा कुछ सहायक अभियंता भी इस टीम में शामिल होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें