लखनऊ। जनता के लिए बनाई जाने वाली आवासीय योजनाओं में कमीशन लेकर घटिया काम कराए जाने की एक बड़ी साजिश एलडीए में रची गई थी। टेंडर की शर्त बदलने को लेकर प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर एससी मिश्र का पत्ता साफ होने की भी यही बड़ी वजह थी। हालांकि खास बात ये है कि टेंडर की शर्त बदली नहीं गई थी बल्कि सभी शर्तों में से एक अहम शर्त को गायब कर दिया गया था, जिससे छोटे और गुमनाम ठेकेदार काम पा सकें।
गड़बड़ी पर बिफरे उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने चार आवासीय योजनाओं में संचालित निर्माण कार्य संबंधी सभी ठेकों के टेंडर तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पारा में संचालित कबीर नगर आवासीय योजना, ऐशबाग में अमन अपार्टमेंट, अलीगंज में सीएस ब्लॉक ईडब्ल्यूएस, गोमतीनगर फेज टू में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) आवासीय कॉलोनी निर्माण कार्य के लिए तय मानक और शर्तों के आधार पर नए सिरे से प्रक्रिया पूरी कर टेंडर जारी करने को कहा था। 17 जनवरी को लिए गए इस एक्शन की परतें अब खुलने लगी हैं। दरअसल, हाउसिंग स्कीम के टेंडर में शर्त थी कि यह काम ठेकेदार पार्टनरशिप में नहीं कर सकेंगे। सालाना जितना भी टर्नओवर होगा, वह अकेली कंपनी का होना जरूरी है। लेकिन इस शर्त के हटते ही अनेक छोटे ठेकेदार मिलकर आसानी से टेंडर पा सकते थे, जबकि काम की गुणवत्ता से उनका कोई लेना-देना नहीं होता।
छोटे ठेकेदारों की गुणवत्ता बेहद खराब
एलडीए पूर्व में आवासीय योजनाओं में छोटे ठेकेदारों से काम कराकर काफी बदनामी झेल चुका है। इनके काम की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि आवंटियों को दोबारा निर्माण करवाना पड़ रहा था, इसीलिए वर्ष-2010 में आवासीय योजनाओं के निर्माण का काम एलएंडटी, मार्ग, नागार्जुन और सिंटेक्स जैसी नामी कंपनियों को दिया गया। केवल बड़ी कंपनियां ही ठेकों में भाग ले सकें, इसलिए निविदा पर सालाना टर्नओवर का उल्लेख किया गया। यह इतना अधिक होता है कि छोटी फर्में नहीं आ सकती हैं। छोटे ठेकेदारों का रास्ता पूरी तरह से बंद करने के लिए एक और शर्त है कि कई फर्में मिलकर बड़ा टर्नओवर दिखाकर भी आवेदन नहीं कर सकती हैं। जानकारों के मुताबिक यहीं पर खेल किया गया और इस शर्त को टेंडर फॉर्म से हटा दिया गया। इसके हटते ही छोटे ठेकेदार पार्टनरशिप करके प्रक्रिया में भाग लेने के लिए आजाद हो गए। वह काफी कम कीमत के टेंडर कोट कर सकते थे, जबकि बड़ी कंपनियों के लिए यह संभव नहीं था। वह अपनी तय लागत के नीचे नहीं जा सकती थीं। कुछ बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधिओं ने उच्च स्तर पर इस बदलाव की शिकायत की, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर कार्रवाई की तैयारी की गई।
अब अधिशासी अभियंताओं की बारी
एलडीए उपाध्यक्ष के कड़े रुख से अभियंताओं में हड़कंप मचा है। अब अपनी गर्दन बचाने के लिए अभियंता पूरी गड़बड़ी का ठीकरा कुछ दिनों पहले हटाए गए मुख्य अभियंता एससी मिश्र पर फोड़ने में जुट गए हैं। उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया का संचालन मुख्य अभियंता स्तर पर ही होता है। इसमें उनकी सहभागिता संबंधित ठेकेदार को टेंडर के तहत कार्य मिलने के बाद शुरू होती है। इसके बावजूद वीसी की ओर से सभी संबंधित एक्सईएन को मेमो जारी कर दिया गया है। उनको अपना जवाब सीधे उपाध्यक्ष को ही सौंपना पड़ेगा। इस मामले में अधिशासी अभियंता सुबोध रॉय, दुर्गेश श्रीवास्तव और ओपी मिश्र को अपना पक्ष देना पड़ेगा। उनको बताना होगा कि टेंडर की शर्त गायब हुई तो उनको जानकारी क्यों नहीं हो सकी।
नए सिरे से किया गया टेंडर
कार्यवाहक चीफ इंजीनियर आरके शुक्ल ने बताया कि उपाध्यक्ष के आदेश पर पारा में संचालित कबीर नगर आवासीय योजना, ऐशबाग में अमन अपार्टमेंट, अलीगंज में सीएस ब्लॉक ईडब्ल्यूएस, गोमतीनगर फेज टू में सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) आवासीय कॉलोनी के निर्माण को लेकर टेंडर नए सिरे से कर दिया गया है। इस बार सभी पुरानी शर्तों का समावेश किया गया है। ऐसे में मानकों को पूरा करने वाली कंपनियां ही आवेदन कर सकेंगी।
इस मामले में अधिशासी अभियंताओं से स्पष्टीकरण मांगा गया है। टेंडर की अहम शर्त गायब होना लिपकीय भूल नहीं थी। ऐसा क्यों हुआ और वह क्या करते रहे, इसका जवाब एक्सईएन को देना पड़ेगा।
राजीव अग्रवाल, उपाध्यक्ष, लविप्रा