लखनऊ। नगर निगम कर्मचारियों को पहली तारीख को वेतन नहीं मिल पाएगा। वेतन के लिए नगर निगम के छह हजार कर्मचारियों को करीब दस दिन इंतजार करना होगा। उसकी भी उम्मीद तब की जा सकती है जब शासन से मिलने वाली साढ़े छह करोड़ रुपये की राशि नगर निगम को तीन चार दिन में मिल जाए। इस रकम की उम्मीद के सहारे ही नगर निगम इस माह का वेतन संकट टालने की आस लगाए है। यदि यह पैसा नहीं मिला तो नगर निगम प्रशासन के लिए वेतन बांटना बहुत मुश्किल होगा।
नगर निगम को कर्मचारियों के वेतन पर हर माह करीब 13.5 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके लिए करीब साल भर पहले तक नगर निगम को राज्य वित्त आयोग से हर महीने करीब 10 करोड़ रुपये की राशि मिलती थी। मगर इधर शासन जेएनएनयूआरएम में बनाए गए एसटीपी के अंशदान के रूप में करीब चार करोड़ रुपये की कटौती हर माह कर ले रहा है। जिससे नगर निगम के सामने वित्तीय संकट गहरा जा रहा है। पहले जहां कर्मचारियों के वेतन के लिए नगर निगम को हर माह करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये का इंतजाम करना पड़ता था वहीं अब करीब साढ़े सात करोड़ रुपये का इंतजाम करना पड़ रहा है। जिसमें निगम प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
इसी के चलते पिछले छह महीने से नगर निगम में हर माह 15 से 20 दिन देरी से वेतन बंटता है। नवंबर का वेतन तो नगर निगम कर्मचारियों को 20 दिसंबर तक मिल पाया है। वह भी तब जबकि नगर आयुक्त सहित सभी बड़े अधिकारियों और केंद्रीय सेवा के कर्मचारियों व अधिकारियों को सबसे बाद में दिया गया। ऐसी ही स्थिति नए साल में मिलने वाली दिसंबर माह के वेतन को लेकर बनी है। दिसंबर का वेतन देने केलिए नगर निगम के पास अभी महज तीन करोड़ रुपये हैं जबकि उसे चाहिए 13.5 करोड़ रुपये। नगर निगम प्रशासन इस उम्मीद में है कि शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि तीन चार दिन में आ जाएगी तो वेतन का संकट कम हो जाएगा। नगर निगम के मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी राजेंद्र सिंह का कहना है कि प्रोत्साहन राशि की रकम जल्द आने की उम्मीद है। उसके आने पर वेतन बांट दिया जाएगा लेकिन अभी वेतन को लेकर कुछ संकट है।