लखनऊ। आशियाना कॉलोनी के विकास का जिम्मा लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) पर डालकर प्रभारी मंत्री ने विकासकर्ता कंपनी अंसल हाउसिंग को दंड की जगह वास्तविकता में पुरस्कार दे दिया है। दरअसल, इसी हैंडओवर को लेने के लिए नगर निगम अंसल हाउसिंग से 25 करोड़ रुपये की डिमांड कर रहा था। अब जबकि मंत्री ने एलडीए को यह जिम्मेदारी सौंपने का एलान किया है तो अंसल इस खर्च को साफ बचा ले जाएगा। उधर, एलडीए उपाध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने मंत्री की ऐसी किसी भी घोषणा की जानकारी होने से इनकार किया है और ऐसी प्रक्रिया न शुरू किए जाने की बात कही है। अंसल हाउसिंग द्वारा निर्मित आशियाना कॉलोनी में कंपनी, नगर निगम और एलडीए तीनों ही विकास कार्य नहीं करा रहे हैं, जिसकी वजह से यहां लोग बहुत परेशान हैं। बृहस्पतिवार शाम जिले के प्रभारी और जंतु उद्यान राज्यमंत्री डॉ. शिव प्रताप यादव ने आवासीय इलाकों व खजाना मार्केट कॉम्पलेक्स का औचक निरीक्षण किया था। इस दौरान आवंटियों और स्थानीय व्यापारियों की पीड़ा सुनकर नाराज मंत्री ने मौके पर ही कॉलोनी व खजाना मार्केंट की देखरेख को लेकर अंसल हाउसिंग और एलडीए के बीच 22 साल से चल रहे अनुबंध को खत्म करने का निर्देश दिया था। मंत्री के इस ऐलान के बाद कॉलोनी की जिम्मेदारी एलडीए के पास आ जाएगी।
25 करोड़ पर अटका था हैंडओवर ः नगर निगम लगातार कहता रहा कि वह अंसल हाउसिंग से आशियाना कॉलोनी का हैंडओवर केवल उसी दशा में लेगा, जबकि उसे 25 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इससे पहले आशियाना कॉलोनी में सीवर लाइन और पानी की व्यवस्था का हैंडओवर बहुत ही कम राशि पर जल संस्थान को किया गया था। इसे एक घोटाले का नाम दिया गया था। इसी वजह से नगर निगम अपने दामन पर कोई दाग नहीं लेना चाहता था। आशियाना कॉलोनी के हैंडओवर के लिए 25 करोड़ की मांग पर नगर निगम लंबे समय से अड़ा था।
मंत्री ने किया रास्ता आसान ः प्रभारी मंत्री की नाराजगी का सीधा फायदा अंसल हाउसिंग को हो रहा है। मंत्री ने कहा था कि अनुबंध खत्म कर और तत्काल सारा रखरखाव एलडीए अपने हाथ में ले। ऐसे में यहां की खराब सड़कें, पार्क, खराब मार्ग प्रकाश व्यवस्था और अन्य दिक्कतों को प्राधिकरण को अपने खर्च पर ही सुधारना होगा पर अंसल एक रुपये भी प्राधिकरण को नहीं देगा। अगर यहां काम आसानी से हो जाता तो नगर निगम कब का कॉलोनी का हैंडओवर खुद लेकर यहां न केवल विकास कर रहा होता बल्कि लोगों से हाउस टैक्स भी वसूल करता।