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फर्श-ए-अजा पर अजादारों ने आंसुओं से दिया पुरसा

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
Lucknow
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लखनऊ। करबला के मासूम शहीद हजरत इमाम हसन के बेटे और हजरत इमाम हुसैन के भतीजे हजरत कासिम को याद कर अजादार खूब रोए। गुरुवार को अजाखाना-ए-शब्बीर में हजरत कासिम के मसायब सुन कर अजादार अपने आंसू रोक न सके। इस दौरान अजाखानों में ताबूत-ए-हजरत कासिम और झूला अली असगर निकाला गया, तो मजलिसों में कोहराम सा मचा। स्याह माहौल में हर एक अजादार करबला के 13 साल के शहीद हजरत कासिम के शबीह-ए-ताबूत को चूमने को बेकरार था। इमामबाड़ा आगा बाकर में मौलाना मीसम जैदी ने मजलिस को संबोधित करते हुए इमाम जाफरे सादिक अलैहिस्सलाम और मौला अली की शिक्षाओं का बखान किया। मौलाना कहा कि इल्म का खजाना तब तक मुकम्मल नहीं हो सकता जब तक हजरत अली व इमामों के इल्म व शिक्षाओं को अमल में नहीं लाया जाता। मौलाना ने कहा कि इमामत रोशनी लेकर आई और खुदा का नूर बनकर सारी दुनिया में फैल गई। उधर, करबला ने हक को इस कदर मजबूत कर दिया कि कुरबानी पेश कर भी हजरत इमाम हुसैन इंसानियत के रहबर बन गए। इंसान को इंसानियत की पहचान कराई। मौलाना ने हजरत इमाम हसन के बेटे कासिम की शहादत के पहले का वाकया बयान किया तो आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान फूलों से सजा हजरत कासिम का शबीह ए ताबूत निकला। शिया पीजी कॉलेज में मौलाना आगा रूही ने हजरत कासिम की शहादत और सुजाहत का बयान करने से पहले कहा कि निकाह ऐसा मजबूत बंधन है जिसे मरते दम तक तोड़ा नहीं जा सकता लेकिन कुछ उलमा तीन बार तलाक कहने वाले का तलाक करा देते हैं। ऐसे उलमा में इल्म की कमी है। मौलाना ने युवाओं को अहलेबैत की शिक्षाओं पर अमल करने की सलाह देते हुए कहा कि युवा बेहतर जिंदगी गुजारें। मौलाना ने बुजुर्गों से अपने बच्चों की दूरियों को कम करने और उन्हें तालीम ए अहलेबैत देने की अपील की। मौलाना ने कहा कि बुजुर्गों और युवाओं में दूरियां समाज में बुराईयां बढ़ा रही हैं। इमामबाड़ा गुफरानमॉब में मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि शियत पर चौतरफा हमले हो रहे हैं लेकिन इस कौम पर खुदा की रहमत है। शियत बीबी फातिमा की दुआ से महफूज है। इसे मिटाने की कोशिश करने वाले ही मिट जाते हैं। इमामबाड़ा जन्नतम्आब में मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने हजरत कासिम के मसायब बयान किए। इस दौरान यहां मेंहदी हजरत कासिम भी निकाली गई। साथ ही तबर्रूकात भी बांटे गए। वक्फ इमामबाड़ा कस्रे जन्नत, जन्नत की खिड़की में मजलिस को मौलाना एजाज हुसैन रिजवी ने संबोधित किया। वहीं मर्दानी मजलिस के बाद यहां महिलाओं की भी मजलिस हुई। मजलिस को जाकिरा हसन आरा ने संबोधित करते हुए हजरत जनाबे जैनब के साथ हजरत कासिम के मसायब बयान किए। इसी क्रम में मौलाना हमीदुल हसन ने मदरसा नाजमियां, इमामबाड़ा जकी अली खां, मकबरा सआदत अली खां, वक्फ इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद, इमामबाड़ा अली नकी साहब व नाजिम साहब के इमामबाड़े में मजलिस-ए-गम का दौर चलता रहा।
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शब्बीर के गम में डूबा पुराना शहर ः गम ए शब्बीर में पुराना शहर ऐसा डूबा की सड़क फर्श ए अजा बन गईं। विक्टोरिया स्ट्रीट पर शाम को या हुसैन की सदा के साथ दूर तक मातमदारों के जत्थे जमा हो गए और मातम-ए-हुसैनी में अपने गम का इजहार करने लगे।
सबीलों पर लंगर बांटा गया ः करबला के शहीदों की प्यास की याद में सबीलों पर लंगर ए आम का दौर चलता रहा, पूरे दिन सबीलों पर चाय, पानी व खाना बांटने का दौर चलता रहा। लंगरों में काफी संख्या में अजादारों ने शिरकत की।
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