हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने गलत हलफनामा दाखिल कर राजकीय आईटीआई मुरादाबाद के प्रिंसिपल की सेवाएं नियमित नहीं किए जाने के मामले में राज्य सरकार पर पांच लाख रुपये हर्जाना ठोका है।
कोर्ट ने कहा कि हर्जाने की रकम उस अफसर से वसूली जाएगी, जिसने याची प्रिंसिपल की सेवाएं नियमित न करने का आदेश दिया था।
इसके साथ ही कोर्ट ने प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा के 9 अगस्त 2010 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसे राजकीय आईटीआई मुरादाबाद के प्रिंसिपल ने चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह व न्यायमूर्ति अशोक पाल सिंह की खंडपीठ ने यह अहम फैसला याची प्रिंसिपल संजय किशोर की रिट को मंजूर कर सुनाया।
हर्जाने की धनराशि में से तीन लाख रुपये याची को दिए जाएंगे, जबकि शेष रकम हाई कोर्ट के मीडिएशन सेंटर लखनऊ को मिलेंगे।
कोर्ट ने आगाह किया, अगर हर्जाने की रकम निर्धारित दो महीने की अवधि में कोर्ट में जमा न की गई तो संबंधित जिलाधिकारी इसे भू राजस्व की तरह पूरी रकम वसूल कर कोर्ट में जमा कराएंगे।
साथ ही कोर्ट ने प्रमुख सचिव व्यवसायिक शिक्षा को याची के कंफर्मेशन व प्रमोशन पर दो महीने में गौर करने के निर्देश दिए।
यह है मामला
याची संजय किशोर 12 अगस्त 1988 को राजकीय आईटीआई में प्रिंसिपल ग्रेड-2 के रूप में नियुक्त हुआ था।
उसे 2005 में उच्च वेतनमान मंजूर तो हुआ मगर उसके प्रमोशन पर विचार नहीं किया गया जबकि याची से कनिष्ठ कर्मचारियों को प्रमोशन पर गौर किया गया था।
इसका कारण याची के खिलाफ अनुशासनात्मक जांच लंबित होना बताया गया। दरअसल याची के खिलाफ 2004 में सतर्कता जांच शुरू हुई थी, जो बाद में बंद हो गई, मगर उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई।
इस जांच में उस पर लगे सभी आरोप निराधार पाए गए। नतीजतन उसे महज चेतावनी देते हुए जनवरी 2007 में उसके खिलाफ जांच खत्म कर दी गई।
इसके बाद याची ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें कोर्ट ने याची के कंफर्मेशन मामले संबंधी प्रत्यावेदन पर चार सप्ताह में गौर किए जाने का निर्देश दिया।