आवासीय और कृषि भूमि बताकर वर्ष 1998 में 47 लोगों के नाम पट्टा की गई लोढ़ी स्थित 9.5 हेक्टेयर व्यावसायिक जमीन गुरुवार को ग्रामसभा के नाम दर्ज कर दी गई। प्रशासन ने सभी पट्टे निरस्त करते हुए मामले की जांच का आदेश दिया है।
वर्ष 1998 में लोढ़ी ग्रामसभा स्थित करीब 9.5 हेक्टेयर व्यावसायिक भूमि का 47 अपात्र लोगों के नाम पर पट्टा कर दिया गया जबकि ग्रामसभा की जमीन भूमिहीन और आवास विहीन लोगों के रहने और खेती के लिए पट्टे पर आवंटित की जाती है। इतना ही नहीं, व्यावसायिक जमीन खेती और आवास के लिए पट्टे पर नहीं दी जाती है।
मामला पहली बार तब सामने आया जब 2001 में इन जमीनों को लेकर मुकदमेबाजी शुरू हुई। हालांकि मामला दबा रहा। अब जब इस मामले ने तूल पकड़ना शुरू किया तो आननफानन प्रशासन ने सभी 47 पट्टे निरस्त कर दिए और जमीन ग्रामसमाज के नाम दर्ज करा दी।
लोढ़ी ग्रामसभा की जमीनों पर कलेक्ट्रेट, विकास भवन, जिला अस्पताल, खनन कार्यालय, जिला उद्योग कार्यालय सहित कई अन्य विभागों के कार्यालय भी हैं। इसी से समझा जा सकता है कि जिस व्यावसायिक जमीन को कृषि और आवासीय बताकर पट्टा कर दिया गया था, उसमें किस स्तर पर खेल किया गया होगा।
अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि सभी पट्टे गलत तरीके से आवंटित किए गए थे। इन्हें निरस्त कर जमीन ग्रामसभा के नाम दर्ज करा दी गई है। मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। कमेटी को जांच जल्द पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।