सानिया मिर्जा के करियर को चोटों से काफी नुकसान पहुंचा और वह मानती हैं कि उनकी उम्र बढ़ रही है लेकिन यह भारतीय टेनिस स्टार खेल को अलविदा कहने से पहले अपनी कैबिनेट में कुछ और ग्रैंड स्लैम ट्रॉफी जोड़ना चाहती है।
जब से इस 26 वर्षीय हैदराबादी ने अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में कदम रखा तब से उन्हें कलाई का दर्द, कूल्हे की मांसपेशियों में खिंचाव से घुटने की समस्या से रू-ब-रू होना पड़ा है। वह खुद मानती हैं कि अब उन्हें चोटों से उबरने में काफी समय लगता है।
सानिया ने कहा कि जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, फिट रहना मुश्किल हो जाता है। हर दिन जब आप उठते हो तो आपको दर्द महसूस होता है, मांसपेशियों में दर्द होता है। मुझे अब इसके लिए ज्यादा कठिनाई होती है जबकि जब मैं 18 साल की थी तो ऐसा नहीं होता था। अब मुझे उबरने में लंबा समय लगता है।
उन्होंने कहा कि मेरी तीन सर्जरी, दो घुटने और एक कलाई की सर्जरी हुई। मेरे शरीर को काफी मुश्किलें सहनी पड़ी क्योंकि टेनिस से शरीर काफी थक जाता है।
सानिया हाल ही में विंबलडन टेनिस टूर्नामेंट के मिक्स्ड डबल्स के क्वार्टर फाइनल में बाद में विजेता बनी डेनियल नेस्टर और क्रिस्टिना मलादेनोविच की जोड़ी से हार गई थी।
अमेरिकी ओपन पर निगाह
उन्होंने कहा कि वह अपनी हार को पीछे छोड़कर सत्र के अंतिम ग्रैंड स्लैम अमेरिकी ओपन में जीत पर निगाह लगाए हैं।
सानिया ने कहा कि निश्चित रूप से यही लक्ष्य है क्योंकि मैं हार्ड कोर्ट पर खेलूंगी, जो मेरा पसंदीदा मैदान है। मैं इसमें जीत पर निगाह लगाए हूं।
उन्होंने कहा, ‘टेनिस दुनिया के कठिन खेलों में एक है। मैं भाग्यशाली रही कि मैंने अब तक दो ग्रैंड स्लैम जीत लिए। उम्मीद है कि मैं करियर खत्म होने से पहले कुछ और ग्रैंड स्लैम जीत हूं।’
सानिया मिर्जा का सफरनामा
सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग
सिंगल्स : 27वें (27 अगस्त 2007)
डबल्स : 7वें (30 जनवरी 2012)
ग्रैंड स्लैम (मिक्स्ड डबल्स)
* आस्ट्रेलियन ओपन : विजेता (2009)
* फ्रेंच ओपन : विजेता (2012)
पदक रिकॉर्ड
* एफ्रो एशियन गेम्स : स्वर्ण (2003, सिंगल्स, डबल्स, मिक्स्ड, टीम)
* एशियाई खेल : स्वर्ण (2006, मिक्स्ड डबल्स)