रोहन बोपन्ना
आईटीएफ ने कभी भी सुमित नागल और मेरे लिए जोड़ी को स्वीकार नहीं किया। आईटीएफ स्पष्ट था कि नामांकन की समय सीमा (22 जून) के बाद चोट/बीमारी के बिना किसी भी बदलाव की अनुमति नहीं थी। एआईटीए ने खिलाड़ियों, सरकार, मीडिया और बाकी सभी को यह कहकर गुमराह किया है कि हमारे पास अभी भी मौका है।
अनिल धूपर, महासचिव, एआईटीएफ
सच तो यह है कि बोपन्ना की रैंकिंग क्वालिफिकेशन के लिहाज से काफी अच्छी नहीं थी। हमने केवल उनकी मदद करने की कोशिश की ताकि वह खेलों में प्रतिस्पर्धा कर सके। उन्होंने अपने दम पर क्वालिफाई क्यों नहीं किया?
सानिया मिर्जा, बोपन्ना के ट्वीट पर
क्या ??? अगर यह सच है तो यह बिल्कुल हास्यास्पद और शर्मनाक है। इसका मतलब यह भी है कि हमने मिश्रित युगल में पदक के एक अच्छे मौके को गंवा दिया। अगर आप और मैं योजना के अनुसार खेलते तो मौका बन सकता था