हालांकि, निशांत के हारने पर सोशल मीडिया पर खूब बवाल हो रहा है। फैंस इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि विपक्षी मुक्केबाज की जमकर धुनाई करने वाले निशांत को आखिरकार हार कैसे मिली। निशांत पूरे मैच के दौरान वेरडे पर हावी दिखे थे। उनके कुछ पंच तो वेरडे सह तक नहीं सके थे। इसके बाद भी जजों यानी पंचों ने फैसला मैक्सिकन मुक्केबाज के पक्ष में सुनाया।
मैच की बात करें तो मुक्केबाजी में कुल तीन राउंड खेले जाते हैं और हर राउंड के बाद पांच जजों की बेंच अपने-अपने स्कोर बताती है। उन्हें दोनों मुक्केबाज को 10 में से अंक देने होते हैं। पहले राउंड में निशांत को चार जज ने 10 दिए और एक ने नौ दिया, जबकि वेरडे को चार जज ने नौ अंक दिए और एक ने 10 दिया था। पहले राउंड के बाद निशांत आगे थे। निशांत ने दूसरे राउंड में भी तीव्रता के साथ खेलना जारी रखा और सीधे जैब किया और वेरडे इसे कवर करने में विफल रहे। वेरडे ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन निशांत के पंच से बच नहीं सके। दूसरे राउंड के बाद दो जज ने निशांत को 10 और तीन ने नौ अंक दिए, जबकि वेरडे को तीन जज ने 10 और दो ने नौ अंक दिए। यह बाउट वेरडे के नाम रहा। तीसरे राउंड में सभी जज ने मिलकर वेरडे को 10 अंक दिए, जबकि निशांत को नौ अंक ही मिले।
यानी निशांत को जज एक ने कुल 29 अंक दिए, जबकि जज- दो, तीन, चार और पांच ने कुल 28-28 अंक दिए। वहीं, वेरडे को जज एक ने 28 अंक दिए, जबकि जज-दो, तीन, चार और पांच ने कुल मिलाकर 29-29 अंक दिए। इस तरह वेरडे ने मैच 4-1 से अपने नाम किया, क्योंकि चार जज के फैसले में वेरडे को ज्यादा अंक थे। इस मुकाबले में रेफरी अजरबैजान के थे। वहीं, जज एक हंगरी के, जज दो अर्जेंटीना के, जज तीन जर्मनी के, जज चार कजाकिस्तान और जज पांच मोरक्को के रहे।
निशांत ने इक्वाडोर के जोस रोड्रिगेज के खिलाफ कड़े मुकाबले के बाद अंतिम आठ में जगह बनाई थी। निशांत के हमवतन अमित पंघाल भी पुरुषों के 51 किग्रा वर्ग के राउंड ऑफ 16 में हारकर पेरिस ओलंपिक से बाहर हो गए थे। यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय मुक्केबाज को इस स्कोरिंग सिस्टम से नुकसान हुआ है। इससे पहले टोक्यो ओलंपिक में भारत की महान मुक्केबाज मैरीकॉम भी महिलाओं की 51 किलोग्राम भारवर्ग में प्री क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गई थीं। तब उन्हें कोलंबिया की विक्टोरिया इनग्रिट वेलेंसिया ने 3-2 से हराया था।
इस मैच में भी जज के फैसले पर सवाल खड़े हुए थे। पहले राउंड में वेलेंसिया के पक्ष में पांच में से चार जजों ने 10-10 का फैसला सुनाया। यही मैच का टर्निंग पॉइंट रहा। मैरीकॉम को इसी बढ़त की वजह से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मेरीकॉम ने बाकी बचे दोनों राउंड जीते, पर वह वेलेंसिया को मिले टोटल पॉइंट को कवर नहीं कर पाईं। उस मैच से पहले तक 38 साल की मैरीकॉम ने 32 साल की वेलेंसिया को दो बार हराया था। जब रेफरी ने मुकाबले के अंत में वेलेंसिया का हाथ ऊपर उठाया, तो मेरीकॉम की आंखों में आंसू थे। मैरीकॉम ने बाद में खुद जजों के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। पहले बॉक्सिंग में हर पंच पर पॉइंट दिए जाते थे और वह एक पारदर्शी स्कोरिंग सिस्टम था, जिसमें मुक्केबाजों को अंदाजा रहता था कि उनके एक पंच से अंक मिलेंगे, लेकिन अब जब से राउंड के आखिरी में जज के मत या यूं कहें स्कोर को अंतिम फैसला माना जाने लगा है, तब से इस इवेंट में कई बॉक्सर इस गलत स्कोरिंग सिस्टम का शिकार बने हैं।