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Olympics: क्या निशांत के साथ हुई बेईमानी? फैंस ने पूछा- देव ने विपक्षी मुक्केबाज को खूब धोया, फिर कैसे हार गए?

Sun, 04 Aug 2024 09:14 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, पेरिस

सार

निशांत के हारने पर सोशल मीडिया पर खूब बवाल हो रहा है। फैंस इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि विपक्षी मुक्केबाज की जमकर धुनाई करने वाले निशांत को आखिरकार हार कैसे मिली। निशांत पूरे मैच के दौरान वेरडे पर हावी दिखे थे।
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पेरिस ओलंपिक - फोटो : PTI
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विस्तार
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पहले दो बाउट में बढ़त बनाने के बावजूद भारतीय मुक्केबाज निशांत देव पेरिस ओलंपिक में पुरूषों के 71 किलोवर्ग के क्वार्टर फाइनल में मैक्सिको के मार्को वेरडे से हारकर बाहर हो गए। वेल्टरवेट के इस मुकाबले में विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक विजेता निशांत ने अच्छी शुरूआत की, लेकिन बंटे हुए फैसले के आधार पर उन्हें 1-4 से पराजय का सामना करना पड़ा। उन्हें पदक पक्का करने के लिये यह मुकाबला जीतना था। अब पेरिस ओलंपिक में मुक्केबाजी में भारत की चुनौती टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन के रूप में ही बची है जो महिलाओं के 75 किलो वर्ग में चीन की लि कियान से रविवार को खेलेंगी।
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पंचों से हारे निशांत देव

निशांत देव - फोटो : PTI
हालांकि, निशांत के हारने पर सोशल मीडिया पर खूब बवाल हो रहा है। फैंस इस बात को पचा नहीं पा रहे हैं कि विपक्षी मुक्केबाज की जमकर धुनाई करने वाले निशांत को आखिरकार हार कैसे मिली। निशांत पूरे मैच के दौरान वेरडे पर हावी दिखे थे। उनके कुछ पंच तो वेरडे सह तक नहीं सके थे। इसके बाद भी जजों यानी पंचों ने फैसला मैक्सिकन मुक्केबाज के पक्ष में सुनाया। 

विजेंदर-रणदीप समेत लोगों की प्रतिक्रियाएं

निशांत देव - फोटो : PTI
मुक्केबाजी में ओलंपिक कांस्य जीत चुके विजेंदर सिंह और अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी बाउट के दौरान स्कोरिंग सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। 23 साल के निशांत ने पहला राउंड जीता था, लेकिन अगले दो राउंड में नतीजा वेरडे के पक्ष में रहा था, जबकि निशांत ज्यादा हावी दिखे थे। ओलंपिक 2008 के कांस्य पदक विजेता विजेंदर ने निशांत को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए तारीफ की और मैच में स्कोर करने की प्रणाली पर सवाल उठाए। विजेंदर ने एक्स पर लिखा- 'मुझे नहीं पता कि स्कोरिंग सिस्टम क्या है, लेकिन मुझे लगता है कि बहुत करीबी लड़ाई थी। निशांत ने इतना अच्छा खेला.. कोई ना भाई।' अभिनेता रणदीप हुड्डा का मानना है कि निशांत को बाहर कर उनसे ओलंपिक पदक लूट लिया गया है। उन्होंने एक्स पर लिखा था, 'निशांत ने इस मैच को जीता था। मैक्सिकन मुक्केबाज की जमकर धुनाई की थी। यह स्कोरिंग क्या है? पदक लूट लिया, लेकिन हमारे मुक्केबाज ने दिल जीत लिया। दुखद है!! अभी कई और मेडल आने हैं छोरे!!








 

किस प्रकार चला मैच?

निशांत देव - फोटो : PTI
मैच की बात करें तो मुक्केबाजी में कुल तीन राउंड खेले जाते हैं और हर राउंड के बाद पांच जजों की बेंच अपने-अपने स्कोर बताती है। उन्हें दोनों मुक्केबाज को 10 में से अंक देने होते हैं। पहले राउंड में निशांत को चार जज ने 10 दिए और एक ने नौ दिया, जबकि वेरडे को चार जज ने नौ अंक दिए और एक ने 10 दिया था। पहले राउंड के बाद निशांत आगे थे। निशांत ने दूसरे राउंड में भी तीव्रता के साथ खेलना जारी रखा और सीधे जैब किया और वेरडे इसे कवर करने में विफल रहे। वेरडे ने दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन निशांत के पंच से बच नहीं सके। दूसरे राउंड के बाद दो जज ने निशांत को 10 और तीन ने नौ अंक दिए, जबकि वेरडे को तीन जज ने 10 और दो ने नौ अंक दिए। यह बाउट वेरडे के नाम रहा। तीसरे राउंड में सभी जज ने मिलकर वेरडे को 10 अंक दिए, जबकि निशांत को नौ अंक ही मिले। 



यानी निशांत को जज एक ने कुल 29 अंक दिए, जबकि जज- दो, तीन, चार और पांच ने कुल 28-28 अंक दिए। वहीं, वेरडे को जज एक ने 28 अंक दिए, जबकि जज-दो, तीन, चार और पांच ने कुल मिलाकर 29-29 अंक दिए। इस तरह वेरडे ने मैच 4-1 से अपने नाम किया, क्योंकि चार जज के फैसले में वेरडे को ज्यादा अंक थे। इस मुकाबले में रेफरी अजरबैजान के थे। वहीं, जज एक हंगरी के, जज दो अर्जेंटीना के, जज तीन जर्मनी के, जज चार कजाकिस्तान और जज पांच मोरक्को के रहे। 

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मैरीकॉम भी हो चुकी हैं शिकार

मैरीकॉम - फोटो : Twitter
निशांत ने इक्वाडोर के जोस रोड्रिगेज के खिलाफ कड़े मुकाबले के बाद अंतिम आठ में जगह बनाई थी। निशांत के हमवतन अमित पंघाल भी पुरुषों के 51 किग्रा वर्ग के राउंड ऑफ 16 में हारकर पेरिस ओलंपिक से बाहर हो गए थे। यह पहली बार नहीं है जब किसी भारतीय मुक्केबाज को इस स्कोरिंग सिस्टम से नुकसान हुआ है। इससे पहले टोक्यो ओलंपिक में भारत की महान मुक्केबाज मैरीकॉम भी महिलाओं की 51 किलोग्राम भारवर्ग में प्री क्वार्टर फाइनल में हारकर बाहर हो गई थीं। तब उन्हें कोलंबिया की विक्टोरिया इनग्रिट वेलेंसिया ने 3-2 से हराया था।

इस मैच में भी जज के फैसले पर सवाल खड़े हुए थे। पहले राउंड में वेलेंसिया के पक्ष में पांच में से चार जजों ने 10-10 का फैसला सुनाया। यही मैच का टर्निंग पॉइंट रहा। मैरीकॉम को इसी बढ़त की वजह से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद मेरीकॉम ने बाकी बचे दोनों राउंड जीते, पर वह वेलेंसिया को मिले टोटल पॉइंट को कवर नहीं कर पाईं। उस मैच से पहले तक 38 साल की मैरीकॉम ने 32 साल की वेलेंसिया को दो बार हराया था। जब रेफरी ने मुकाबले के अंत में वेलेंसिया का हाथ ऊपर उठाया, तो मेरीकॉम की आंखों में आंसू थे। मैरीकॉम ने बाद में खुद जजों के फैसले पर सवाल खड़े किए थे। पहले बॉक्सिंग में हर पंच पर पॉइंट दिए जाते थे और वह एक पारदर्शी स्कोरिंग सिस्टम था, जिसमें मुक्केबाजों को अंदाजा रहता था कि उनके एक पंच से अंक मिलेंगे, लेकिन अब जब से राउंड के आखिरी में जज के मत या यूं कहें स्कोर को अंतिम फैसला माना जाने लगा है, तब से इस इवेंट में कई बॉक्सर इस गलत स्कोरिंग सिस्टम का शिकार बने हैं। 

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