खत्री ने जीतने के बाद कहा, 'मैंने इस नतीजे की उम्मीद नहीं की थी, पर मैं रजत पदक से खुश हूं। मैं परिस्थितियों से सांमजस्य बिठाने पांच दिन पहले यहां आ गया था, लेकिन ऊंचाई से मुझ पर असर पड़ा। रेस में कहीं कहीं मैं सही से सांस नहीं ले पा रहा था लेकिन मैं अपने रजत पदक से खुश हूं।' बता दें कि खत्री का यह पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था। वहीं, खत्री के कोच चंदन सिंह ने कहा, 'अमित ज्यादातर रेस में आगे चल रहा था लेकिन कीनिया के एथलीट ने अचानक एक-डेढ़ लैप पहले बढ़त ले ली। अमित स्वर्ण पदक जीत सकता था लेकिन ऊंचे इलाके से असर पड़ा। कीनियाई एथलीट इस तरह की घरेलू परिस्थितियों में ट्रेनिंग कर रहा था, जिससे उसे फायदा मिला।'
खत्री के रजत पदक जीतते ही उनके कोच चंदन सिंह ने उन्हें टारगेट ओलंपिक पोडियन योजना (टॉप्स) में शामिल करने की मांग कर दी। उन्होंने कहा कि अमित में टॉप क्लास के रेस वॉकर बनने की क्षमत है और इसका उद्देश्य 2024 के पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना है। कोच ने खत्री की तारीफ करते हुए समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, 'उसकी (अमित खत्री) चलने की तकनीक बहुत अच्छी है और वह जल्दी सीख जाता है। वह अगले कुछ वर्षों में देश में शीर्ष पैदल चाल खिलाड़ी बन सकता है लेकिन उसे आगे बढ़ने के लिए धनराशि की आवश्यकता होगी। इसलिए मैं साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) से उसे टॉप्स योजना में शामिल करने का अनुरोध करता हूं।' उन्होंने आगे कहा, 'अमित को 2024 के ओलंपिक के लिए तैयार करना है, लेकिन उसके पास कोई प्रायोजक नहीं है, जिससे उसे आर्थिक रूप से मदद मिल सके।'