हमारे देश में पिछले कई दशकों से क्रिकेट को खूब जन समर्थन और प्रोत्साहन मिला है। इसका परिणाम यह रहा कि हम क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करते रहे, लेकिन अन्य खेलों में पिछड़ गए। हालांकि क्रिकेट के मैदान पर भी हम जो कीर्तिमान स्थापित कर सकते थे, वो नहीं कर पाए।
टोक्यो ओलंपिक खेलों में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कुल 7 पदक जीते
भारतीय क्रिकेट टीम सन 1983 और 2011 में विश्व कप विजेता बनी। इसके अलावा 2003 में उप-विजेता और तब से यह सफर सेमीफाइनल तक जारी रहा। इस वर्ष संपन्न हुए टोक्यो ओलंपिक खेलों में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर कुल 7 पदक जीते। खेल के सबसे बड़े मंच पर पिछले वर्षों की तुलना में यह हमारा शानदार प्रदर्शन रहा।
हालांकि शतरंज, बैडमिंटन, टेनिस, हॉकी, कुश्ती, बॉक्सिंग और निशानेबाजी जैसे खेलों में हम अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन सामाजिक सहयोग न होने के कारण ये खेल आज तक जन खेल नहीं बन पाए। ओलंपिक के इतिहास में भारत ने हॉकी में 8 स्वर्ण पदक जीते हैं, बावजूद इसके हमारे देश में हॉकी जन सामान्य का खेल नहीं बन सका।
इसका कारण स्पष्ट है कि हॉकी और अन्य खेलों को प्रोत्साहन नहीं मिला। खेल के क्षेत्र में अपने देश के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए भारत सरकार ने सन 2018 से ‘खेलो इंडिया’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
इसका प्रमुख उद्देश्य यह था कि भारत के प्रत्येक गांव में सभी प्रकार के खेलों को प्रोत्साहन मिल सके और हम प्रत्येक खेल में अच्छे खिलाड़ियों का निर्माण करते हुए ओलंपिक व विश्व स्तर पर अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकें। वहीं सन 2021 के बजट में भी खेलों को प्रोत्साहन देते हुए सरकार ने विभिन्न खेल प्राधिकरणों को बजट आवंटन में अच्छी खासी धनराशि आवंटित की है।
‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ पर हम सभी को भारत के प्रत्येक खेल को जन सामान्य का खेल बनाने के लिए संकल्प लेना होगा। हम किसी एक या दो खेलों को ही प्रोत्साहन न दें, बल्कि जितने भी खेल हैं और उनके जो भी युवा खिलाड़ी तैयारी हो रहे हैं, उन सभी को बराबर प्रोत्साहन और जन समर्थन मिलेगा, तो निश्चित रूप से आने वाले समय में हम वैश्विक स्तर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकेंगे।