फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनु रानी: खेतों में गन्ने फेंकना, बना भाला फेंक का पहला सबक, आठ बार तोड़ चुकी है राष्ट्रीय रिकॉर्ड

Tue, 20 Jul 2021 09:35 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कभी छिपकर ट्रेनिंग करने वालीं मेरठ की अनु रानी 60 मीटर से ऊपर की थ्रो फेंकने वाली देश की पहली एथलीट
  • आठ बार तोड़ चुकी है राष्ट्रीय रिकॉर्ड, टोक्यो में निगाह नए कीर्तिमान पर    
  • 63.24 : मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है अनु रानी के नाम
विज्ञापन
अनु रानी - फोटो : twitter@Media_SAI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत की महिला फेंक एथलीट अनु रानी आठ बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ चुकी है। पिछला रिकॉर्ड मार्च में फेडरेशन कप में तोड़ा था। मेरठ के बहादुरपुर गांव की एथलीट 60 मीटर से ऊपर की थ्रो फेंकने वालीं देश की पहली महिला हैं। तीन साल पहले दोहा में विश्व एथलेटिक्स के फाइनल्स में पहुंचकर इतिहास रचा था। अनु की कामयाबी के पीछे संघर्षों की एक मजबूत नींव है।

विज्ञापन


किसान परिवार में जन्मीं अनु ने सोचा नहीं था कि बचपन में खेतों में गन्ना फेंकना भालाफेंक का पहला सबक होगा। शुरुआत में जब खेलों में कदम आगे बढ़ाया तो लोगों के ताने भी सुने। शुुरुआत में तो ट्रेनिंग भी छिप-छिपकर करती थीं। सात साल पहले लखनऊ में अंतर राज्य चैंपियनशिप में जब पहली बार राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा तो फिर मुड़कर नहीं देखा।

विज्ञापन

अभ्यास के लिए सही जोड़ीदार की कमी 
अनु बताती हैं कि कोरोना के दौर में मुश्किलें आईं। विदेशों में प्रतियोगिताएं कम मिलीं। देश में तो अभ्यास के लिए उन्हें सही जोड़ीदार की कमी महसूस होती है। ओलंपिक में कड़ी चुनौती के बीच उन्हें अपने से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वालीं एथलीट ने पिछले माह अंतर राज्य एथलेटिक्स 62.83 मीटर की थ्रो फेंकी लेकिन 64 मीटर के ओलंपिक क्वालिफाइंग मार्क को हासिल नहीं कर सकीं। उन्हें रोड टू टोक्यो में 18वीं रैंकिंग के चलते ओलंपिक में भाग लेने का मौका मिला।

भाई के जूते पहनकर खेलीं
अनु बताती हैं कि शुरुआत में ट्रेनिंग के लिए बड़ी आर्थिक दिक्कतें आईं। भाला खरीदने की तो छोड़ो महंगे स्पोर्ट्स शूज भी नहीं थे। भाई के बड़े जूतों को पहनकर अभ्यास किया जबकि वो फिट भी नहीं आते थे। भाई ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। शुरुआत में बांस को भाला बनाकर फेंका था। पिता से प्रोत्साहन मिला तो सपनों को जैसे पंख लग गए। कहती हैं, परिवार का बड़ा योगदान है। मुझे याद है कि जब ट्रेनिंग के खर्चों के लिए पिता ने दोस्तों से कई बार पैसे उधार लिए। तब यह ठान लिया था कि कुछ करके दिखाना है। सबकी मेहनत और संघर्ष बेकार नहीं जाना चाहिए।

गुरमीत के 21 साल बाद अनु : 
अनु रानी से पहले महिला भालाफेंक एथलीट के रूप में गुरमीत कौर ने 2000 सिडनी ओलंपिक में हिस्सा लिया था।

ये पदक जीते :
2014 इंच्योन एशियाई खेल, एशियन चैंपियनशिप 2017 भुवनेश्वर कांस्य, 2019 एशियाई चैंपियनशिप रजत पदक, 2016 दक्षेस खेल गुवाहाटी रजत पदक
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें