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एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप: स्वर्ण पदक से चूके अमित पंघाल और शिव थापा, फाइनल में हारे

Mon, 31 May 2021 08:52 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई

सार

  • एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में हारे अमित पंघाल
  • स्वर्ण पदक मुकाबले में उज्बेकिस्तान के मुक्केबाज ने हराया
  • रजत पदक से करना पड़ा संतोष
  • जूरी ने पंघाल की हार का रिव्यू ठुकरा दिया
  • शिव थापा भी स्वर्ण पदक से चूके, मंगोलिया के मुक्केबाज ने हराया
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अमित पंघाल - फोटो : social media
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विस्तार
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भारतीय मुक्केबाज अमित पंघाल (52 किग्रा) स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए। एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप के फाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। खिताबी मुकाबले में उन्हें रियो ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता और मौजूदा विश्व चैंपियन उज्बेकिस्तान के मुक्केबाज जोइरोव शाखोबिदीन ने 3-2 से हराया। इस हार के साथ पंघाल को रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। पंघाल के बाद शिव थापा (64 किग्रा) को भी फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। असम के इस मुक्केबाज को एशियाई खेलों के रजत पदक विजेता मंगोलिया के बातरसुख चिनजोरिग ने 3-2 से हरा दिया। इसी के साथ थापा को भी सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा।  

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जूरी ने पंघाल की हार का रिव्यू ठुकरा दिया
भारत ने एशियाई मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में गत चैम्पियन अमित पंघाल की 52 किलो वर्ग के फाइनल में हार का रिव्यू मांगा था, जिसे जूरी ने ठुकरा दिया। पंघाल को अब रजत पदक से ही संतोष करना पड़ेगा। भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने ट्वीट किया था, 'एएसबीसी फाइनल में अमित पंघाल की अप्रत्याशित हार के खिलाफ अपील करेगा।' महासंघ ने बाद में ट्वीट किया कि भारतीय टीम द्वारा दर्ज किया गया विरोध जूरी ने खारिज कर दिया।

बाउट रिव्यू व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने 2019 में शुरू की थी। टीम मैनेजर या हारने वाले मुक्केबाज के मुख्य कोच को फैसले के 15 मिनट बाद तक विरोध दर्ज कराने का मौका दिया जाता है। अगले 30 मिनट में उसे कागजी काम पूरा करना होता है। इस व्यवस्था में 5-0 या 4-1 के फैसले रिव्यू के दायरे में नहीं आते हैं। हर टीम को दो रिव्यू दिए जाते हैं। जूरी का फैसला अंतिम और सर्वमान्य होता है। इससे पहले भारतीय मुक्केबाज साक्षी चौधरी (54 किलो) ने फाइनल में जगह गंवा दी क्योंकि कजाकिस्तान की दीना जोलामैन ने दो बार की युवा विश्व चैम्पियन के खिलाफ अंतिम चार में मिली हार को चुनौती दी थी और वह फैसला बदलने में कामयाब रही।
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हार के बाद पंघाल का ट्वीट
हार के बाद पंघाल ने ट्वीट कर कहा, 'ये सिल्वर मेडल, मेरे देश के युवाओं, मेरे कोच अनिल धनकड़ के नाम, काश इस वक्त वो यहां दुबई में होते, किरेन रिजिजू सर बस यही इच्छा है की टोक्यो मेडल के वक्त वे मेरे साथ खड़े हों।' बता दें कि इससे पहले आठ भारतीय मुक्केबाज सिमरनजीत कौर (60 किग्रा), विकास कृष्ण (69 किग्रा), लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा), जैस्मीन (57 किग्रा), साक्षी चौधरी (64 किग्रा), मोनिका (48 किग्रा), स्वीटी (81 किग्रा) और वरिंदर सिंह (60 किग्रा) को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। इन सबने देश के लिए कांस्य पदक के साथ पुरस्कार के तौर पर 2,500 डॉलर हासिल किए हैं।
 
 
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