टोक्यो ओलंपिक में शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम इतिहास रचने से चूक गई। टीम को ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ हार सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही भारतीय महिला हॉकी टीम का ओलंपिक पदक जीतने का सपना अधूरा रह गया। रानी रामपाल के नेतृत्व में टीम इंडिया को ब्रिटेन के हाथों कांस्य पदक मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। ब्रिटेन ने ब्रॉन्ज मेडल के मैच में भारत को 4-3 से हराया। हालांकि दोनों टीमों के बीच आखिरी मिनट तक बेहद रोमांचक मुकाबला चला और भारतीय खिलाड़ियों ने अपना पूरा जोर लगाया लेकिन अंत में बाजी ब्रिटेन ने मारी। इस जीत के साथ ही ब्रिटेन ने जहां लगातार तीसरा ओलंपिक मेडल हासिल किया वहीं भारतीय टीम पहली बार ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही।
भारतीय टीम ने पहली बार सेमीफाइनल में पहुंचकर पहले ही इतिहास रच दिया था। मगर लेकिन 2016 रियो ओलंपिक की स्वर्ण पदक विजेता ब्रिटेन को हरा नहीं सकी। भारतीय महिला टीम ने पांच मिनट के भीतर तीन गोल किए। गुरजीत कौर ने 25वें और 26वें मिनट में जबकि वंदना कटारिया ने 29वें मिनट में गोल दागे। वहीं, ब्रिटेन के लिए एलेना रायेर ने 16वें, साारा रॉबर्टसन ने 24वें, कप्तान होली पीयर्ने वेब ने 35वें और ग्रेस बाल्डसन ने 48वें मिनट में गोल दागे। बता दें कि भारतीय महिला हॉकी टीम मास्को ओलंपिक 1980 में भी छह टीमों में चौथे स्थान पर रही थी। महिला हॉकी ने तब ओलंपिक में पदार्पण किया था और मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गए थे, जिसमें शीर्ष पर रहने वाली दो टीमें फाइनल में पहुंची थी।