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सुनहरी यादें: टीम इंडिया क्रिकेट से पहले हॉकी में बनी थी विश्व चैंपियन  

Fri, 11 Aug 2017 01:50 PM IST
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
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हॉकी
ध्यानचंद और कैप्टन रूप सिंह का युग भारतीय हॉकी का स्वर्णिम युग कहलाता है। 1928 से 1956 के दौर में भारतीय हॉकी दुनिया में प्रतिष्ठित रही। इस दौरान भारत ने छह बार ओलं‌पिक के स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। 28 साल के इस सुनहरे सफर के बाद 1971 तक हॉकी की हालत देश में दयनीय हो गई थी। आसानी से हॉकी टीम किसी छोटे देश से भी हार जाया करती थी। लेकिन ध्यानचंद के सुपुत्र अशोक कुमार ने अपने पिता की तरह ही एक बार फिर इस देश में हॉकी के सुनहरे दिन लौटाए। भारत ने 1975 के हॉकी विश्व में जीत हासिल कर दुनिया में फिर से अपना दबदबा कायम किया। हॉकी में पहली बार विश्व कप जीत कर अशोक कुमार पिता ध्यानचंद की तरह प्रतिष्ठित हो गए थे। 
 
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अशोक और असलम की जोड़ी ने किया कमाल 

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विश्व चैंपियन - फोटो : sportskeeda
मलेशिया के कुआलालंपुर में अशोक कुमार और मोहम्मद असलम शेर खान ने देश को विश्व चैंपियन बनाया। दुनिया में पहली बार 1971 में विश्व कप का आयोजन किया गया। इस पहले विश्व कप में भारत ने कांस्य पदक जीता था। दूसरे विश्व कप में 1973 में भारत ने रजत पदक हासिल कर‌ लिया था। इस तरह हॉकी का पुर्नजागरण 1971 में ही हो गया। 1975 में इसकी सुनहरी तस्वीर आई।    
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दूसरे विश्व कप की हार से देश निराश था 

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विश्व चैंपियन - फोटो : hockey india
दूसरे विश्व कप में 1973 में भारत को फाइनल में हालैंड ने 2 के मुकाबले 4 गोलों से हराया। देश पूरी तरह निराश था। लेकिन महज दो साल बाद ही हॉकी की टीम ने अपना परचम लहरा दिया। भारत ने 1975 में पहले मैच में इंग्लैंड को 2-0 से हराया और ऑस्ट्रेलिया से मुकाबला ड्रा रहा। घाना को 7-1 से हराया। ब्रिटेन और जर्मनी को भी परास्त किया। सेमीफाइनल में मलेशिया को उसके घर में हराना आसान नहीं था। मैच खतम होने में महज 17 मिनट बचे ‌थे और मलेशिया 2-1 से आगे होने की वजह से अपनी जीत तय मान रहा था। इसी बीच असलम शेर खां ने कमाल की तेजी दिखाते गोल दाग देश को बराबरी पर ला दिया। तीसरा गोल हरचरण सिंह ने दागा और देश फाइनल में पहुंच गया।
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फाइनल में पाक को हराया 

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विश्व चैंपियन - फोटो : rediffmail
फाइनल में भारत और पाकिस्तान की टीम आमने-सामने थी। मैच के शुरुआती क्षण में पाक ने गोल दाग बढ़त बना ली ‌थी। हाफ टाइम तक पाक हावी रहा। इसके बाद ध्यानचंद के सुपुत्र अशोक कुमार ने कमाल दिखाया। पहला गोल दाग भारत को बराबरी पर ला खड़ा किया। अशोक कुमार ने दूसरा गोल भी दागा और देश को पहली बार विश्व चैंपियन बनाया।
 
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