सवाल- अगर बात की जाय आपके सब्र की तो, यहां तक पहुंचने के लिए आपको किन किन समस्याओं का सामना करना पड़ा है?
जवाब- चाहे कोई भी खिलाड़ी हो, किसी भी फील्ड से हो, हर किसी की जिंदगी में संघर्ष आता है। मुझे भी बचपन में खाने पीने में दिक्कतें आईं। टाइम से खाना नहीं मिलता था। दरअसल, माता-पिता को नहीं पता था कि मैं प्रोफेशनल प्लेयर के तौर पर खेलने जाता हूं। उस समय किसी को पता नहीं होता है कि खेल-खेल में कौन कहां पहुच जाता है। शुरुआत में थोड़ी बहुत दिक्कतें आईं। उस समय मेरे गांव के एक कोच ने मेरा बहुत साथ दिया। गांव के जो कुछ पुराने हॉकी खिलाड़ी थे, उन सभी ने काफी मदद की। सबने थोड़ा-थोड़ा करके मदद की, जिसके कारण आज मैं यहां हूं। एक समय ऐसा भी आया, जब लग रहा था कि खेलना छोड़ दूं। पढ़ाई में भी उतना अच्छा नहीं था। परिवार में भी गरीबी थी तो फिर लगा कि हॉकी ही मुझसे कुछ करवा सकती है और इससे उबार सकती है। भगवान ने साथ दिया, गांववालों ने साथ दिया और मेरी मेहनत रंग लाई।
सवाल- जब आपने पहली बार हॉकी स्टिक उठाई थी तो आपकी उम्र क्या थी?
जवाब- जब पहली बार हॉकी स्टिक उठाई थी तो मुझे भी नहीं पता था कि मैं क्या करने जा रहा हूं। गांव-घर के झगड़े से बचने के लिए मेरे भाई ने मुझे खेलने के लिए भेजा था क्योंकि मैं बचपन में थोड़ा शरारती था। घर पर मेरी शिकायतें थोड़ी ज्यादा आती थीं। मम्मी बोलती थीं कि इसे खेलने के लिए ले जाओ। बस पता ही नहीं चला कि हॉकी से कब इतना प्यार हो गया। मेरे गांव के कोच ने शुरू से ही मेरी मदद की। इसलिए मैं हॉकी खेलना जारी रख सका। भगवान की दुआ से बस सबकुछ होता गया।
सवाल- भविष्य का क्या प्लान है?
जवाब- अगले साल एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स पर पूरा ध्यान है। हमारा मुख्य फोकस एशियन गेम्स पर है। हम चाहते हैं कि इसमें हम गोल्ड लेकर आएं। एशियन गेम्स में अगर गोल्ड आता है तो हम सीधे पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफाई हो जाएंगे। कॉमनवेल्थ गेम्स पर भी हमारा पूरा फोकस रहेगा। हम कॉमनवेल्थ गेम्स के सिल्वर मेडलिस्ट हैं। काफी समय से इसमें मेडल नहीं आया है तो हम इस बार चाहते हैं इसमें भी गोल्ड आए।
सवाल- घर में माता पिता का कैसा सपोर्ट मिला?
जवाब- मेरे माता पिता हों या किसी के माता पिता हों, वे बच्चे को सपोर्ट करते ही हैं। मां छुपा-छुपाकर पैसे देती थीं। मैं उनका बहुत लाडला था। पापा बीमार रहते थे। वो कुछ भी मजदूरी करते थे तो बीमार हो जाते थे। पापा के बीमार होने के कारण मां और भाई ने मेरी देखभाल की।
सवाल- जब भारतीय टीम ने हॉकी में पदक जीता तो पहली बार ऐसा हुआ कि भारत में क्रिकेट से ज्यादा हॉकी की चर्चा थी, वो आपको कैसा लगा?
जवाब- वह मेरे लिए बहुत गौरव का क्षण था। मैं भी क्रिकेट का जबरदस्त फैन था। आगे-पीछे क्रिकेट ही दिखता था। जब हमने देश के लिए पदक जीता तो एक टाइम ऐसा लग रहा था कि हमारी हॉकी अब उस जगह पर वापस आ गई है जहां पहले कभी थी। इतने वर्षों में कोई हॉकी को पूछता नहीं था, लेकिन पदक जीतने के बाद लोग हॉकी को इतना प्यार दे रहे हैं। आने वाले समय में हॉकी में पदक का कलर चेंज करेंगे।
सवाल- हरियाणा सरकार ने कितना सपोर्ट किया है?
जवाब- हरियाणा सरकार से बहुत ही ज्यादा सपोर्ट किया है। फाइनेंशियल तौर पर सरकार ने काफी मदद किया है। सरकार ने तो नियम भी बना दिया है कि आप मेडल लेकर आओ हम आपको पैसा देंगे। मेडल जीतने के बाद सरकार जितना पैसा देती है, उतना तो आम आदमी नॉर्मल लाइफ में भी नहीं कमा पाता है। हरियाणा सरकार का मैं धन्यवाद करना चाहूंगा कि वो खिलाड़ियों के लिए इतना सबकुछ कर रहे हैं।
सवाल- हॉकी में सुधार के लिए क्या सुझाव देना चाहेंगे?
जवाब- मेरा सुझाव यही है मैंने जो संघर्ष किया है, वह बाकी खिलाड़ी नहीं करें। जैसे मुझे ग्राउंड नहीं मिला, टर्फ नहीं मिला तो मैं सरकार से यही कहना चाहूंगा कि हरियाणा में और ज्यादा से ज्यादा टर्फ ग्राउंड बनाए जाएं, जिससे खिलाड़ी तैयारी हो सकें और देश के लिए अधिक से अधिक मेडल ला सकें।
सवाल- महिला हॉकी टीम भी टोक्यो ओलंपिक में बहुत अच्छा खेली, बेशक पदक नहीं जीती, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
जवाब- मेडल से ज्यादा लड़कियों ने देश का दिल जीत लिया। बहुत ही गर्व की बात है। लगातार तीन मैच हारने के बाद जिस तरह से महिला टीम ने वापसी की वह काबिले तारीफ है। बड़ी-बड़ी टीम को हराकर सेमीफाइनल में पहुंचना अपने आप में बड़ी बात है। लड़कियों को सैल्यूट है।