हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ने 1928, 32 और 36 के तीन ओलंपिक खेलों में देश को गोल्ड मेडल दिलाया था। तीनों ओलंपिक में ध्यानचंद ने कुल 39 गोल किए थे। 1928 के हॉलैंड के एम्सटडर्म ओलंपिक में ध्यानचंद ने कुल 14 गोल किए। यहां पहले मैच में भारत ने ऑस्ट्रिया को 6-0 से हराया था। इसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए थे। बेल्जियम को 9-0 से हराया था। इसमें ध्यानचंद ने 1 गोल किया। इसी तरह डेनमार्क को भारत ने 5-0 से हराया, जिसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए। स्विट्जरलैंड के खिलाफ 6-0 की जीत में ध्यानचंद ने 3 गोल किए। नीदरलैंड के खिलाफ फाइनल में 3-0 की जीत में ध्यानचंद ने 2 गोल किए।
लॉस एंजिल्स में अमेरिका को 24-1 से हराया
मेजर ध्यानचंद
1932 के अमेरिका के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में ध्यानचंद ने कुल 12 गोल किए थे। जापान को टीम इंडिया ने 11-1 से हराया था। जिसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए थे। अमेरिका को भारत ने 24-1 के भारी अंतर से हराया था। इसमें ध्यानचंद ने 8 और उनके भाई रूप सिंह ने 10 गोल किए थे।
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बर्लिन आेलंपिक में ध्यानचंद ने 13 गोल किए
मेजर ध्यानचंद
1936 के बर्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद की उम्र 31 साल की हो गई थी। इसके बाद भी उनकी हॉकी गोल बरसाती रही। इस ओलंपिक में ध्यानचंद ने 13 गोल किए। भारत ने पहले मैच में हंगरी को 4-0 से हराया। इसमें ध्यानचंद ने एक भी गोल नहीं किया। दूसरे मैच में अमेरिका को 7-0 से हराया। इसमें ध्यानचंद ने 2 गोल किए। तीसरे मैच में जापान को 9-0 से हराया। इसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए। फ्रांस को टीम इंडिया ने 10-0 से करारी मात दी। इसमें ध्यानचंद ने 4 गोल किए। जर्मनी को फाइनल में टीम इंडिया ने 8-1 के अंतर से हराया। इसमें ध्यानचंद ने 3 गोल किए। इस ओलंपिक में जर्मनी के खिलाफ मैच में गोलकीपर टीटो वर्नहोल्टज से टकरा कर ध्यानचंद के दांत भी टूट गए थे।
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