यह बाकी मीम्स की तरह हंसाने वाला नहीं बल्कि डराने वाला था। यह एक आंकड़ा था। फुटबॉल विश्व कप के दौरान औरतों के साथ होने वाली घरेलू हिंसा का मामला। कोई इंग्लैंड की जीत इतनी शिद्दत से नहीं चाहता, जितना की औरतें। क्योंकि जब इंग्लैंड की टीम हारती है तो औरतों के साथ घरेलू हिंसा की घटनाएं 38% तक बढ़ जाती हैं। हिंसा को 'रेड कार्ड' दिखाइए।
यह मीम घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था 'पाथवे प्रोजेक्ट' के एक जागरूकता अभियान का हिस्सा है।
ब्रिटेन की लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी ने भी साल 2013 में इस विषय पर रिसर्च की थी और उसमें भी फुटबॉल विश्व कप के दौरान औरतों के साथ हिंसा बढ़ने की बात सामने आई। इस रिसर्च में साल 2002, 2006 और 2010 में विश्व कप के मैचों पर नजर डाली गई।
नतीजों में पता चला कि अगर इंग्लैंड की टीम मैच हारती थी तो पुलिस के पास औरतों के साथ होने वाली हिंसा के मामले 38% तक बढ़ जाते थे और जब इंग्लैंड जीतती या मैच ड्रॉ होता तो 26%।
नतीजों में पाया गया कि मैच के अगले दिन भी औरतों से मारपीट में 11% की बढ़त थी। इस रिसर्च में तो सिर्फ पुलिस के पास आने वाली शिकायतों को आधार बनाया गया, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग इस बारे में दूसरे भी कई पहलू जोड़ रहे हैं।
पाथवे प्रोजेक्ट के लिए काम करने वाली लेंडा नेपिन के मुताबिक कई बार फ़ुटबॉल के साथ शराब, ड्रग्स, जुए और सट्टे जैसी चीजें मिलकर इसे महिलाओं के लिए और बुरा बना देती हैं।
उन्होंने कहा, 'मेरे पास 17 साल की एक लड़की का उदाहरण है। वो अपने 21 साल के पार्टनर के साथ छुट्टियां मनाने गई थी। वे साथ में फुटबॉल मैच देख रहे थे और इंग्लैंड की टीम हार गई। मैच की शाम लड़की हॉस्पिटल में थी क्योंकि उसके ब्वॉयफ्रेंड ने उसके साथ मारपीट की थी।'
लेंडा बताती हैं कि फुटबॉल के गेम में कई तरह की भावनाएं शामिल होती हैं। मसलन, जुनून, गर्व, उत्साह और 'लैड कल्चर' (लड़कों की हुल्लड़बाजी)। उनका मानना है कि महिलाओं और लड़कियों पर इन सबका बुरा असर पड़ सकता है।
बात सिर्फ मारपीट की नहीं है। कई औरतों को फुटबॉल मैच के दौरान अपने पार्टनर द्वारा मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। ठीक उसी तरह, जैसे कि पेनी को करना पड़ा।
पेनी जब भी टीवी पर फुटबॉल मैच की झलकियां देखतीं, वो अपने ब्वॉयफ्रेंड से दूर हो जातीं। मगर हमेशा ऐसा करना मुमकिन नहीं था क्योंकि वो एक ही बेडरुम के फ्लैट में रहते थे।
वो याद करती हैं, 'उसके ज्यादा दोस्त नहीं थे इसलिए वो चाहता था कि मैं उसके साथ फुटबॉल देखूं। मैं देखती भी थी, लेकिन साथ ही चुपचाप बैठकर उसके टीम के जीतने की दुआ भी मांगती थी। क्योंकि मुझे पता था कि अगर उसकी टीम हारेगी तो क्या होगा।' पेनी ने बताया कि जब भी उनके ब्वॉयफ्रेंड की पसंदीदा टीम हारती वो उनसे बात करना बंद कर देते थे।
हालांकि कइयों का ये भी मानना है कि फुटबॉल तो एक बहाना भर है क्योंकि औरतों के साथ रोजाना हिंसा होती है। मगर इस साल वर्ल्ड कप के दौरान हिंसा पर सोशल मीडिया पर खुलकर बातचीत और बहस हो रही है।
कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और पुलिस स्टेशन भी ऐसी औरतों की मदद के लिए आगे रहे हैं। पुलिस की ओर से भी अलग से चेतावनी जारी की गई है। पेनी इन कोशिशों और पहल से खुश हैं। उनका मानना है जितना ज्यादा औरतें वर्ल्ड कप के दौरान होने वाली हिंसा की शिकायत पुलिस में करेंगी, उनके लिए उतना ही अच्छा होगा।