भारतीय दल पेरिस ओलंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए तैयार है और पहला जत्था बुधवार को रवाना हो गया है। पांच स्वर्ण सहित एक दर्जन पदक जीतने की उम्मीद के साथ भारत के पैरालंपिक एथलीटों का पहला जत्था स्टार भाला फेंक खिलाड़ी सुमित अंतिल की अगुआई में पेरिस रवाना हुआ। परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढालने के लिए पैरालंपिक खिलाड़ी समय से पहले रवाना हुए हैं। देश के 16 पैरा एथलीट उद्घाटन समारोह से तीन दिन पहले 25 अगस्त को खेल गांव में प्रवेश करेंगे और उससे पहले कुछ दिन पेरिस के होटलों में रुकेंगे।
पैरालंपिक में अपने खिताब की रक्षा करने वाला पहला भारतीय बनने के लिए चुनौती पेश करने वाले अंतिल सहित अन्य भारतीय खिलाड़ी फ्रांस की राजधानी के पास की सुविधाओं में प्रशिक्षण लेंगे ताकि वे वहां के मौसम के अनुकूल खुद को ढाल सकें। पैरा एथलेटिक्स स्पर्धाएं 30 अगस्त से पैरालंपिक के समापन दिवस आठ सितंबर तक स्टेड डी फ्रांस में आयोजित की जाएंगी। इसी स्टेडियम में पेरिस ओलंपिक के दौरान सक्षम खिलाड़ियों ने प्रतिस्पर्धा की थी। नेल्सन मंडेला खेल परिसर स्टेड डी फ्रांस से लगभग पांच किमी दूर है। इसमें एथलेटिक्स, रग्बी, टेनिस, व्हीलचेयर टेनिस और तैराकी के लिए अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। अंतिल (पुरुष भाला फेंक एफ64), दीप्ति जीवनजी (महिला 400 मीटर टी20), सचिन खिलाड़ी (पुरुष गोला फेंक एफ46), एकता भयान (महिला क्लब थ्रो एफ51), सिमरन शर्मा (महिला 200 मीटर टी12) और मरियप्पन थंगावेलु (पुरुष ऊंची कूद टी42) ने स्वर्ण पदक जीते थे।
भारत ने टोक्यो में जीते थे रिकॉर्ड 19 पदक
भारत ने 2021 में टोक्यो पैरालंपिक में रिकॉर्ड 19 पदक (पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य) जीते थे। भारत पैरालंपिक में 12 खेलों में 84 खिलाड़ियों की अपनी अब तक की सबसे बड़ी टीम भेज रहा है जिसमें 38 पैरा एथलीट भी शामिल हैं। भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष देवेंद्र झझारिया ने पेरिस खेलों से कम से कम 25 पदक जीतने की भविष्यवाणी की है।
अंतिल-भाग्यश्री होंगे ध्वजवाहक
अंतिल और हांगझोउ एशियाई पैरा खेलों में महिलाओं की गोला फेंक एफ34 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाली भाग्यश्री जाधव उद्घाटन समारोह में भारत के ध्वजवाहक होंगे जो पहली बार किसी स्टेडियम के बाहर आयोजित किया जाएगा। यह समारोह चैंप्स-एलिसीस से पेरिस के मध्य में प्लेस डे ला कॉनकॉर्ड तक आयोजित किया जाएगा। पेरिस ओलंपिक का उद्घाटन समारोह भी सीन नदी के तट पर स्टेडियम के बाहर आयोजित किया गया था जो खेलों के इतिहास में पहली बार हुआ था।