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साइना के बाद सिंधू ने भी लिख डाला सफलता का नया इतिहास

Fri, 19 Aug 2016 09:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीवी सिंधू - फोटो : PTI
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लंदन में साइना नेहवाल के कांस्य के बाद पीवी सिंधू ने आज रियो में रजत पदक जीतकर भारतीय बैडमिंटन में सफलता का जो इतिहास लिखा है वो नायाब है।
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लंदन ओलंपिक में जब साइना कांस्य पदक के लिए खेल रही थी तो 16 साल की पीवी सिंधू सोच रही थी मेरा नंबर कब आएगा। जैसे-जैसे कैलेंडर के पन्ने पलटे वैसे-वैसे सिंधू की मेहनत और संकल्प और कड़ा होता चला गया।

नतीजा सारी दुनिया के सामने है कि सिंधू ने भारतीय शटल को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, नई उड़ान दे दी है। आज सिंधू ओलंपिक में भारत की सबसे सफल महिला खिलाड़ी बन गई है। और साइना के बाद दूसरी ओलंपिक पदक विजेता भी बनी। सिंधू ने अपने पहले ही ओलंपिक में रजत पदक जीतकर भारतीय खेल का इतिहास रच दिया। वह रजत जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं। 
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अपने ही आदर्श और सीनियर खिलाड़ी साइना के नक्शे कदम पर चलकर सिंधू ने वो हासिल कर लिया जो आज तक भारत का कोई बैडमिंटन खिलाड़ी नहीं कर पाया। ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला तो खैर वह बन ही गईं।

रियो ओलंपिक से पहले सिंधू ने सपने को साझा किया था "ओलंपिक पदक का पीछा करना मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा लक्ष्य है। मुझे याद है कि जब लंदन ओलंपिक में साइना खेल रहीं थीं तो मैंने उनका हर मैच बड़े ध्यान से देखा था। तब मैं विश्व रैंकिंग में 25वें नंबर पर थीं। मैंने हमेशा ओलंपिक में खेलने का ख्वाब देखा है।"
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सिंधू के ऐतिहासिक करियर की 5 खास बातें

PV sindhu - फोटो : PTI
वांग यिहान के खिलाफ जीत यादगार 
पीवी सिंधू ने ओलंपिक के क्वार्टर फाइनल में दुनिया की पूर्व नंबर एक और लंदन ओलंपिक की रजत पदक विजेता वांग यिहान को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। उनके शॉट और क्रासकोर्ट रिटर्न बेहद शानदार थे। सिंधू की नजर में वांग यिहान के खिलाफ जीत उनके करियर की यादगार जीतों में शामिल रहेगी। सिंधू ने इस मुकाबले में 22-20, 21-19 से जीत दर्ज की थी।
 
सिंधू के लिए शानदार रहा 2013 का साल
पुसरला वेंकटा सिंधू यानी पीवी सिंधू के लिए 2013 का साल खुशगवार रहा जब उन्होंने पहली बार मलयेशियन ओपन के रूप में पहला ग्रां प्री खिताब जीता। उसके बाद मकाऊ ओपन भी जीतने में सफल रही। मकाऊ ओपन उन्होंने अपने करियर में तीन बार जीता है लेकिन 2013 में इस हैट्रिक की शुरुआत हुई थी। फिर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वालीं पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं। इसी साल सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से नवाजा था। 
 
खानदानी खिलाड़ी हैं पीवी सिंधू 
भारतीय बैडमिंटन स्टार सिंधू के पिता पीवी रमन्ना और मां पी विजया वॉलीबॉल के बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। सरकार ने उन्हें अर्जुन अवॉर्ड देकर भी सम्मानित किया है। सिंधू का खेलों के प्रति रुझान स्वाभाविक था। खेल तो जैसे उन्हें घुट्टी में मिला है और जीत के लिए जूनुन और जज्बा उनकी नसों में दौड़ता रहता है।

कोच गोपी को देखकर चुना बैडमिंटन 
मां और पिता वॉलीबॉल के खिलाड़ी लेकिन सिंधू ने बैडमिंटन को चुना। दरअसल वह पुलैला गोपीचंद को अपना आदर्श मानती रही है जब आठ साल की उम्र में उन्होंने रैकेट उठाया तो गोपी जैसा खिलाड़ी बनने का सपना था। सौभाग्य से वही गोपीचंद उन्हें कोच के रूप में मिले और उनके मार्गदर्शन और गुरुमंत्र ने सिंधू को इस मुकाम तक पहुंचा दिया। वर्ष 2014 में उन्हें एक निजी चैनल के पुरस्कार में में वर्ष का श्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। इसी साल उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में अपना दूसरा पदक जीता था। 
 
पद्मश्री पाने वाली सबसे युवा खिलाड़ी 
मार्च 2015 में सिंधू को पद्मश्री मिला और वह चौथा उच्चतम नागरिक सम्मान पाने वालीं सबसे युवा भारतीय बनीं। उस समय उनकी उम्र 20 साल थी। पहले सिंधू लंबी रैलियां खेलती थीं और उनका खेल काफी रक्षात्मक था लेकिन उसके बाद वह खेल में बड़ा बदलाव लाईं। ओलंपिक में तो वह बिल्कुल बदली खिलाड़ी नजर आईं जो शुरुआत में ही अपने आक्रामक तेवरों से प्रतिद्वंद्वी को बैकफुट पर ले आती हैं।
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