एशियाई खेलों में महिलाओं की तीन हजार मीटर स्टीपलचेज को पहली बार 2010 ग्वांग्झू में शामिल किया गया था। इसके बाद से एशियाड के चार संस्करणों में भारत पांच पदक जीत चुका है। 2010 एशियाड में सुधा सिंह ने स्वर्ण जीता था। वहीं, 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में ललिता बाबर ने कांस्य पदक अपने नाम किया था। 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में सुधा सिंह ने रजत पदक अपने नाम किया था। अब 2023 हांगझोऊ एशियाई खेलों में पारुल और प्रीति ने दो पदक जीते हैं। ऐसा पहली बार हुआ है।
फाइनल में बहरीन की यावी विनफ्रेड मुतिले ने 9:18:28 के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पारुल 9:27:63 के समय के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। वहीं, प्रीति और बहरीन की मेकोनेन के बीच कड़ी टक्कर थी। हालांकि, अंतिम क्षणों में प्रीति ने गजब की दौड़ लगाई और तीसरे स्थान पर पहुंचने में कामयाब रहीं। उन्होंने 9:43:32 का समय लिया।
महिलाओं की तीन हजार मीटर स्टीपलचेज में बहरीन सबसे सफल देश है। उसने इस इवेंट में दो स्वर्ण जीते हैं। वहीं, भारत पांच पदक, जिसमें एक स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य शामिल हैं। चीन ने दो रजत, जापान और वियेतनाम ने एक-एक कांस्य जीता है। स्टीपलचेज एक चुनौतीपूर्ण ट्रैक-एंड-फिल्ड खेल है, जिसमें खिलाड़ियों को तरह-तरह की चुनौतियां दी जाती हैं। इस खेल में धावक को निश्चित बाधाएं और पानी की छलांग को पार करते हुए दौड़ पूरी करनी होती है।
पारुल ने हाल ही में बुडापेस्ट में खेले गए विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप की तीन हजार मीटर स्टीपलचेज के फाइनल में भी कमाल किया था। वह इस दौड़ में 11वें स्थान पर रही थीं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया था। विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 9:15.31 के समय के साथ दौड़ पूरी की थी। साथ ही पेरिस ओलंपिक के लिए भी क्वालिफाई कर लिया था। पारुल ने तब ललिता बाबर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था। ललिता ने रियो 2016 ओलंपिक में 9:19.76 के समय के साथ तीन हजार मीटर स्टीपलचेज की दौड़ पूरी की थी।