स्वर्ण पदक के साथ सिफ्त (बाएं) और कांस्य के साथ आशी (दाएं)
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सिफ्त ने हाल ही में पेरिस ओलंपिक की रेंज से अभ्यस्त होने के लिए भारतीय शूटिंग टीम के साथ पेरिस की यात्रा की थी। वह बताती हैं कि शूटिंग के चलते 80 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं होने के चलते वह एमबीबीएस की परीक्षाएं नहीं दे पाई थीं। उस दौरान भी उनके सामने बड़ा धर्मसंकट था कि परीक्षाएं चुनें या शूटिंग, उन्होंने तब भी शूटिंग को चुना। उन्हें एमबीबीएस जारी रखने के लिए फिर से प्रथम वर्ष की पढ़ाई करनी थी, लेकिन भोपाल विश्व कप में पदक जीतने के दौरान जब वह पोडियम पर चढ़ीं और देश का झंडा ऊपर गया तो उनका सिर गर्व से ऊंचा हो गया। उनके पिता पवनदीप सिंह और उन्होंने उसके बाद एमबीबीएस छोड़ने का फैसला ले लिया।
सिफ्त ने पांच साल पहले ही शूटिंग शुरू की है। बीते वर्ष उन्होंने जूनियर विश्व चैंपियनशिप में एक स्वर्ण, दो रजत और कांस्य जीता। इसके बाद उन्होंने सीनियर टीम में जगह बनाई और अब वह एशियाड में स्वर्ण जीत चुकी हैं। सिफ्त ने जुलाई के अंत में में चीन में हुए वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भी हिस्सा लिया था, जहां उन्हें मल्टी स्पोर्ट्स खेल आयोजन का अनुभव मिला था। सिफ्त ने इसमें भारत के लिए दो स्वर्ण पदक जीते थे। खासतौर पर खाने के बारे में उन्हें पता लग गया था। इस अनुभव का फायदा उन्हें एशियाई खेलों में मिला।
आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में भी सिफ्त दो कांस्य पदक जीत चुकी हैं। जूनियर कप में तो उनका रिकॉर्ड और शानदार है। उन्होंने पिछले साल एक ही जूनियर कप में एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक जीते थे। हालांकि, वर्ल्ड चैंपियनशिप में अभी तक सिफ्त का खाता नहीं खुला है। 2008 ओलिंपिक में अभिनव बिंद्रा ने भारत को शूटिंग में गोल्ड दिलाया था। 2012 में तो शूटिंग में दो मेडल मिले, लेकिन पिछले दो ओलिंपिक में भारत को शूटिंग में एक भी मेडल नहीं मिला है। अब पेरिस में देश को शूटिंग से एक बार फिर काफी उम्मीदें होंगी। सिफ्त से भी काफी उम्मीदें होंगी।
सिफ्त के पिता तो किसान हैं, लेकिन उनका परिवार डॉक्टरों का परिवार है। उनके चार से पांच चचेरे भाई-बहन डॉक्टर हैं। उनका छोटा भाई भी निशानेबाज है और स्कूल नेशनल में पदक जीत चुका है। सिफ्त के मुताबिक उसने 12वीं की परीक्षा के बाद नीट क्वालिफाई किया, लेकिन उसने शूटिंग छोड़ दी है और वह डॉक्टरी की पढ़ाई करेगा।