अगर आप पेड़ की ऊंची डाल पर बैठे हों तो दो किलोमीटर दूर से आ रही बैलगाड़ी दिखाई दे सकती है। पेड़ के नीचे खड़े व्यक्ति से कह सकते हैं कि आधा घंटा बाद यहां से एक बैलगाडी़ निकलेगी। वह व्यक्ति जमीन पर पास से देखें तो, दस कदम दूर की चीजें भी नहीं दिखाई देती।
जमीन पर खड़े उस व्यक्ति के लिए पेड़ की ऊंची शाखा पर बैठे व्यक्ति की बात भविष्य कथन जैसी लग सकती है और वह भविष्य में यानी आधा घंटा बाद सही भी होगी। इसलिए चमत्कारी सिद्धि की तरह हो सकती है।
चमत्कारी भविष्यवाणियों को इसी तरह समझा जा सकता है। ऐसे चमत्कार हो सकते है। पर उन व्यक्तियों द्वारा जिनकी चेतना सामान्य या औसत लोगों से ऊपर उठी हो। आमतौर पर हमें वर्तमान की, अपने आसपास की घटनाओं की जानकारी होती है। भविष्य की या पिछली बहुत सी घटनाओं की जानकारी नहीं होती।
उपरोक्त सिद्धांत के अलावा सामान्य स्थितियों में भी यदा-कदा हरेक के साथ ऐसी घटनाएं घट जाती है, जिनसे लगता है कि कोई विलक्षण शक्ति काम कर रही है, जो भूत, भविष्य अथवा वर्तमान में झांकने की क्षमता रखती है।
चेतना के उच्चस्तर पर पहुंच जाने के बाद की गई भविष्य कथन और इस तरह की वृत्तियां इस बात का प्रमाण है कि अतीन्द्रिय ज्ञान एक विलक्षण उपलब्धि है। हम पांच ज्ञानेन्द्रियों के जरिए वस्तु या दृश्यों का विवेचन कर पाते हैं, परंतु कभी किसी में छठी इन्द्रिय या अतिंद्रीय ज्ञान की क्षमता भी जाग उठती है।
अतीन्द्रिय क्षमताओं को प्रायः चार वर्गों में बांटा सा सकता है: परोक्ष दर्शन-अर्थात वस्तुओं और घटनाओं की वह जानकारी, जो ज्ञान प्राप्ति के बिना ही उपलब्ध हो जाती है। एक बिना किसी बाहरी साधन के भविष्य के गर्भ में झांककर घटनाओं को होने से पहले जान लेना। दूसरे बिना किसी साधन के अतीत की घटनाओं की जानकारी।
और बिना किसी आधार के अपने विचारों को दूसरे के पास पहुंचाना। प्रसिद्ध वैज्ञानिक विल्हेम वॉन लिवनीज के अनुसार हर व्यक्ति में यह संभावना छिपी पड़ी है कि वह अपनी अन्तर्प्रज्ञा को जगाकर भविष्य काल को वर्तमान की तरह दर्पण में देख ले।