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Geeta Updesh: सफल होना चाहते हैं तो भगवान कृष्ण की इन बातों को रखें याद

Sun, 09 Jun 2024 10:41 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shri Krishna Geeta Updesh:गीता में श्रीकृष्ण के वचन हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहते हैं। ऐसे समय में आपको गीता के कुछ सुझावों को ध्यान में रखना चाहिए ताकि आप अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें
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Geeta Ke Updesh - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Geeta Updesh: श्रीमद्भागवत गीता भगवान श्री कृष्ण के उपदेशों की व्याख्या करती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के माध्यम से संसार को गीता का उपदेश दिया। महाभारत युद्ध के मैदान में जब अर्जुन के कदम डगमगाने लगे तो कृष्ण ने उन्हें गीता का पाठ पढ़ाया। श्रीकृष्ण की शिक्षा सुनकर अर्जुन अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निकल पड़े। वे कहते हैं कि जीवन की सभी समस्याओं का समाधान गीता में है। गीता में श्रीकृष्ण के वचन हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहते हैं। ऐसे समय में आपको गीता के कुछ सुझावों को ध्यान में रखना चाहिए ताकि आप अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें और जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति जीवन में गीता की इन बातों का पालन करता है उसे हर काम में सफलता जरूर मिलती है। ये हैं गीता के अनमोल उपदेश जो आपको दिखाएंगे जीने की नई राह...

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अनावश्यक चिंताओं से बचें
श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि तुम व्यर्थ चिंता मत करो। हर किसी को एक दिन मरना है, आत्मा न तो जन्मती है और न ही मरती है। चूँकि आत्मा अमर है, इसलिए हमें अनावश्यक चिंताओं को छोड़कर कर्म का मार्ग अपनाना चाहिए।

अपने मन पर नियंत्रण रखें
हर किसी को अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए। गीता के उपदेश में श्रीकृष्ण कहते हैं कि जिसने अपने मन पर नियंत्रण करना सीख लिया वह सभी प्रकार की बाधाओं को आसानी से पार कर सकता है। इसलिए व्यक्ति को हमेशा अपने मन पर नियंत्रण रखना चाहिए।
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क्रोध पर नियंत्रण
जब भगवान श्रीकृष्ण गीता का उपदेश दे रहे होते हैं तो वे अर्जुन से कहते हैं कि क्रोध से सभी प्रकार के काम बिगड़ने लगते हैं। मनुष्य का पाप में गिरना क्रोध से शुरू होता है। इसके अलावा, व्यक्ति अच्छे और बुरे परिणामों के बीच अंतर करना भूल जाता है और खुद को विनाश के रास्ते पर ले जाता है। इसलिए आपको क्रोध करने से बचना चाहिए। प्रत्यक्ष वस्तु के लिए कण

परिणाम की इच्छा छोड़कर कर्म पर ध्यान दें 
श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि व्यक्ति को फल की इच्छा छोड़कर अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए। व्यक्ति जो भी कार्य करता है उसे उसके अनुरूप ही फल मिलता है। इसलिए व्यक्ति को अच्छे कर्म करते रहना चाहिए।  

आत्म सम्मान बनाएं रखें 
श्रीकृष्ण के अनुसार किसी व्यक्ति को खुद से बेहतर कोई नहीं जान सकता, इसलिए खुद का मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है। गीता कहती है कि जो व्यक्ति अपने गुणों और कमजोरियों को जानता है वह अपने व्यक्तित्व को आकार देकर किसी भी कार्य में सफलता प्राप्त कर सकता है।
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