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Geeta Jayanti 2021: श्री कृष्ण के मैनेजमेंट सूत्र आपको दिला सकते हैं भविष्य में तरक्की

Tue, 14 Dec 2021 07:40 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली

सार

Geeta Jayanti 2021: इस बार गीता जयंती 14 दिसंबर, मंगलवार  को मनाई जा रही है। महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने जो उपदेश दिए थे, इनमें मैनेजमेंट के सूत्र छिपे हुए हैं। जिनको समझकर कोई भी मनुष्य अपने जीवन में छोटे छोटे बदलावों से उन्नति कर सकता है। तो आइए आपको गीता उपदेश में छिपे हुए मैनेजमेंट सूत्रों के बारे में बताते हैं। 
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Geeta Jayanti 2021 (prateekatmak tasveer)
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विस्तार
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गीता जयंती का पर्व हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती हैं। इस दिन कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता के उपदेश दिया था। उस समय मोहवश अर्जुन ने शस्त्र त्याग दिए थे। तब गीता के माध्यम से ही भगवान श्रीकृष्ण ने संसार को धर्मानुसार कर्म करने की प्रेरणा दी। वास्तव में यह उपदेश भगवान श्रीकृष्ण कलयुग के मापदंड को ध्यान में रखते हुए ही दिया है। इस बार गीता जयंती 14 दिसंबर, मंगलवार  को मनाई जा रही है। महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने जो उपदेश दिए थे, इनमें मैनेजमेंट के सूत्र छिपे हुए हैं। जिनको समझकर कोई भी मनुष्य अपने जीवन में छोटे छोटे बदलावों से उन्नति कर सकता है। तो आइए आपको गीता उपदेश में छिपे हुए मैनेजमेंट सूत्रों के बारे में बताते हैं। इन मैनेजमेंट सूत्रों का अगर हम आज भी अपने जीवन में उतारेंगे तो भविष्य में उन्नति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। चलिए जानते हैं क्या हैं वो मैनेजमेंट सूत्र 

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Geeta Jayanti 2021 (prateekatmak tasveer)
यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जन:।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते।।

अर्थात श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करते हैं, सामान्य पुरुष उसी को आदर्श मानकर लोग उसका अनुसरण करते हैं।
भगवान श्री कृष्ण के इस उपदेश से जो हमें मैनेजमेंट का मंत्र मिलता है उसके अनुसार श्रेष्ठ व्यक्ति को हमेशा अपने पड़ और गरिमाके अनुसार ही व्यवहार या आचरण करना चाहिए। क्योंकि वह लोगों के लिए आदर्श हैं और वो जैसा करेंगे लोग भी वैसा ही अनुसरण करेंगे। 

Geeta Jayanti 2021 (prateekatmak tasveer)
विहाय कामान् य: कर्वान्पुमांश्चरति निस्पृह:।
निर्ममो निरहंकार स शांतिमधिगच्छति।।

अर्थात जो मनुष्य अपनी इच्छाओं और कामनाओं को त्यागकर ममता रहित और अहंकार रहित होकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है, उसे ही शांति मिलती है।
यहां भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार जिस मनुष्य के मन में किसी प्रकार की इच्छा व कामना होती है, उसे कभी सुख शांति प्राप्त नहीं होती। अतः सुख-शांति प्राप्त करने के लिए मनुष्य को सबसे पहले अपनी इच्छाओं का त्याग करना होगा। हम कर्म के साथ उसके आने वाले परिणाम के बारे में सोचते हैं जो हमें दुर्बल बनाता है। लेकिन हमें परिणाम कि चिंता न करके अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए, जिससे हम अपने कर्तव्य का पालन कर सकें
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Geeta Jayanti 2021 (prateekatmak tasveer)
न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्म संगिनाम्।
जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्त: समाचरन्।।

अर्थात ज्ञानी पुरुष, कर्मों में आसक्त अज्ञानियों की बुद्धि में भ्रम उत्पन्न न करे, स्वयं (भक्ति से) युक्त होकर कर्मों का सम्यक् आचरण कर, उनसे भी वैसा ही कराये।।
भगवान कृष्ण के श्लोक को अगर हम आज से जोड़ कर देखें तो आज का दौर प्रतिस्पर्धा का दौर है। यहां हर कोई आगे बढ़ने की होड़ में लगा हुआ है। ऐसे में अक्सर देखा जाता है कार्यस्थल में जो चतुर होते हैं वो अपने साथी को कोई भी प्रयास करने से रोकते हैं और स्वयं मौका पाकर आगे निकल जाते हैं। मगर श्रेष्ठ वही होता है, जो अपने कार्यों से दूसरे के लिए आदर्श बन जाए।
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