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Buddha Purnima 2020: गौतम बुद्ध के 10 उपदेश, पालन करने पर दूर हो सकती हैं हमारी कई परेशानियां

Thu, 07 May 2020 12:39 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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बुद्ध पूर्णिमा 2020: भगवान बुद्ध ने चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया था।
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वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि पर बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान गौतम बुद्ध की जयंती मनाई जाती है। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस बार यह 07 मई को है। इसी तिथि पर भगवान बुद्ध का जन्म कपिलवस्तु के पास लुम्बिनी में हुआ था। इनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इन्होंने बहुत ही कम आयु में घर छोड़कर संन्यासी का जीवन जीने लगे थे। गौतम बुद्ध ने 27 वर्ष की आयु में संन्यासी बन गए थे। संन्यास के दौरान भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। जिस स्थान पर इन्हें ज्ञान हासिल हुआ उस स्थान को बोधगया कहा गया। भगवान बुद्ध ने बौद्ध धर्म की स्थापना की थी और अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया। बुद्ध पूर्णिमा के दिन बौद्ध धर्म के मानने वाले अपने घरों पर दीपक जलाते हैं और ग्रंथों का पाठ कर गौतम बुद्ध के बताए हुए रास्ते पर चलने की कसम खाते हैं। भगवान बुद्ध ने चार आर्य सत्यों का उपदेश दिया था। वहीं हिंदू धर्म में भी इनकी पूजा होती है इन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

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गौतम बुद्ध के कुछ विचार...


क्रोध के बारे में- क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। हमेशा क्रोध में रहना, गर्म कोयले को किसी दूसरे पर फेंकने के लिए पकड़े रहने के सामान होता है। इसमें हमारा हाथ भी जलता है।

ईर्ष्या के बारे में- किसी के प्रति नफरत और ईर्ष्या रखने से जीवन में कोई भी खुशी नहीं प्राप्त की जा सकती। ईर्ष्या व्यक्ति के मन की शांति को खत्म कर देती है।
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शंका के बारे में- शक से हमेशा बचना चाहिए। बेवजह किसी पर कभी भी शक नहीं करना चाहिए। शक लोगों को अलग कर देता है।

अज्ञानी के बारे में- अज्ञानी व्यक्ति से कभी भी उलझना और बहस नहीं चाहिए। अज्ञानी व्यक्ति बैल के समान होता है। वह ज्ञान में नहीं, सिर्फ आकार में बड़ा दिखता है।

दुख के बारे में- न ही सुख स्थायी और न ही दुख। बुरा समय आने पर उसका डटकर सामना करना चाहिए और हमेशा रोशनी की तलाश करनी चाहिए।

समय के बारे में- जो बुरा समय बीत गया हो उसको याद नहीं करना चाहिए। भविष्य के लिए सपने नहीं देखना चाहिए, बल्कि वर्तमान में ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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साधना के बारे में- जीवनभर बिना ध्यान के साधना करने की अपेक्षा जीवन में एक दिन समझदारी से जीना कहीं अच्छा है।

सेहत के बारे में- व्यक्ति अपने अच्छे और बुरे स्वास्थ्य का जिम्मेदार स्वयं होता है। इसीलिए खान-पान और दिनचर्या का ध्यान रखना चाहिए।

आध्यात्मिक जीवन के बारे में- जैसे मोमबत्ती बिना आग के नहीं जल सकती वैसी ही मनुष्य भी आध्यात्मिक जीवन के बिना नहीं जी सकता।

सत्य के बारे में- तीन चीजें ज्यादा देर तक नहीं छुप सकतीं सूर्य, चंद्रमा और सत्य।

 
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