किस पूजा के लिए कैसा होना चाहिए आसन-
कंबल या ऊनी आसन पर बैठकर पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है। लाल रंग के कंबल का आसन, लक्ष्मी जी, हनुमान जी और मां दुर्गा की आराधना के लिए उत्तम रहता है। तो वहीं मंत्र सिद्धि आदि के लिए कुशा का बना आसन सही रहता है लेकिन श्राद्ध कर्म आदि करते समय कुशा के आसन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
जानिए आसन से जुड़े ये नियम
- पूजा करते समय कभी भी दूसरे व्यक्ति का आसन प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- पूजा करने के बाद आसन को ऐसे ही न छोड़ें, और इधर-उधर न पड़े रहने दें, इससे आसन का निरादर होता है।
- आसन को साफ हाथों से ही उठाएं और सही से तय करने के बाद उचित स्थान पर ही रखें।
- पूजा के आसन का प्रयोग अलग से किसी कार्य जैसे भोजन करना आदि को करते समय न करें।
- पूजा करने के पश्चात भी आसन से सीधे न हटें बल्कि आचमन से थोड़ा सा जल भूमि पर अर्पित करें और धरती पर प्रणाम करें।
- अब अपने आराध्य देव या देवी का स्मरण कर उन्हें प्रणाम करने के बाद आसन को उठाकर सही प्रकार से रखें।