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Pausha Putrada Ekadashi 2023: पौष पुत्रदा एकादशी व्रत आज,जानिए महत्व,पूजाविधि, कथा और शुभ मुहूर्त

Mon, 02 Jan 2023 09:35 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन सृष्टि के पालनहार परमेश्वर श्री विष्णुजी की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है।
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Putrada Ekadashi 2023 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Pausha Putrada Ekadashi 2023 : नए साल का पहला एकादशी व्रत अर्थात पौष पुत्रदा एकादशी व्रत आज 2 जनवरी को रखा जा रहा है। सनातन धर्म में एकादशी व्रत को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन सृष्टि के पालनहार परमेश्वर श्री विष्णुजी की विधि-विधान से पूजा करने का विधान है।
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महत्व-
मान्यता है कि जो कोई भी जातक पौष पुत्रदा एकादशी व्रत रखता है, उसे संतान के उज्जवल भविष्य एवं दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जातक के जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन क्षीर सागर में विश्राम करने श्री नारायण एवं माता लक्ष्मी की उपासना करने से व्यक्ति को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।पदम् पुराण के अनुसार इस व्रत को करने से अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है एवं श्री हरि अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।संतान प्राप्ति की कामना के लिए इस व्रत को बहुत ही अच्छा उपाय माना गया है।

पूजाविधि-
पौष पुत्रदा एकादशी जाने-अनजाने में किए सभी प्रकार के पापों को दूर करने वाली है। इस दिन समस्त कामनाओं तथा सिद्धियों के दाता भगवान श्री नारायण की उपासना करनी चाहिए।एकादशी व्रत के नियम दशमी की रात से ही शुरू हो जाते हैं इसलिए दशमी की शाम को सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन करें एवं सुबह सूर्यास्त से पहले उठकर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान सबसे पहले एक कलश को लाल वस्त्र से बांधें फिर उसकी पूजा करके इस कलश के ऊपर भगवान की तस्वीर रखें। विष्णु जी की प्रतिमा के सामने घी का दीप जलाएं एवं जल,अक्षत, पुष्प, चंदन, धूप, वस्त्र आदि अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें और पुत्रदा एकादशी की कथा का पाठ करें। भगवान को प्रसाद अर्पित करने के बाद आरती करें। पूरे दिन निराहार रहें व शाम के समय फलाहार कर लें।
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संतान की इच्छा रखने वाले ये करें-
संतान कामना के लिए इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। योग्य संतान के इच्छुक दंपत्ति प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र पहनकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें।इसके बाद संतान गोपाल मंत्र का जाप करना चाहिए।

कथा-
प्राचीन समय में भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। विवाह के काफी समय बाद भी राजा-रानी संतान सुख से वंचित थे।एक दिन दुखी होकर राजा घोड़े पर सवार होकर गहन वन में चले गए और उस सघन वन में राजा भ्रमण करने लगे। वन में राजा को एक सुन्दर सरोवर के पास कुछ वेद पाठ करते हुए मुनि दिखाई पड़े । राजा मुनियों के पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया । मुनियों ने बताया कि हम विश्वदेव हैं,यहां स्नान के लिए आए हैं। राजा ने उनसे अपनी संतानहीनता का दुःख बताया और इसका उपाय भी पूछा। मुनियों ने राजा से कहा कि आपने बड़े ही शुभ दिन यह प्रश्न किया है,आज पौष शुक्ल एकादशी तिथि है। इसके बाद मुनियों के द्वारा बताई गई विधि से राजा ने पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा । इस व्रत के पुण्य से रानी ने कुछ समय बाद एक तेजस्वी पुत्र को जन्म दिया । बड़ा होकर राजा का यह पुत्र धर्मात्मा और प्रजापालक हुआ।

शुभ मुहूर्त-
ज्योतिष पंचांग के अनुसार पौष मास की पुत्रदा एकादशी तिथि का प्रारंभ 1 जनवरी को शाम 7:12 बजे पर होगा और इसका समापन 2 जनवरी शाम 8:24 पर होगा। उदया तिथि के अनुसार  2 जनवरी, सोमवार को व्रत रखा जाएगा।

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